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दीवार बनी कफन: बारिश में दब गईं मजदूरों की चीखें, बाकी थे तबाह हुई गृहस्थी के निशां, मंजर देख कांप उठे लोग
Sat, 17 Sep 2022 01:20 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 17 Sep 2022 01:20 PM IST
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Lucknow wall collapsed
- फोटो : अमर उजाला
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बच्चों के खिलौने टूटकर बिखरे पड़े थे तो बर्तन, साइकिल मलबे में दबकर कबाड़ हो गए थे। कपड़े, कथरी, तिरपाल फटे-नुचे हाल में थे। राशन ईंटों के नीचे दबा था। बारिश व कीचड़ के बीच तबाह हुई गृहस्थी के यही निशां बाकी थे। दीवार के नीचे दबे मजदूरों की उन चीखों को महसूस किया जा सकता था, जो बारिश में दबकर रह गईं और जिन्हें समय रहते मदद नहीं मिल सकी। दम तोड़ती बच्ची, उसकी मां व पिता की तस्वीर आंखों के सामने घूमती दिखी। कुछ ऐसा ही मंजर शुक्रवार को दिलकुशा में दीवार गिरने से हुए हादसे के बाद मौके पर नजर आया। बारिश के बीच ‘अमर उजाला’ की टीम घटनास्थल पर पहुंची, जहां मजदूरों की गृहस्थी बिखरी पड़ी थी। भारी बारिश के चलते गुरुवार आधी रात दिलकुशा में सैन्य अफसरों के गौर कॉन्क्लेव की 50 फीट की दीवार का एक हिस्सा गिर गया, जिसके नीचे मजदूर व उनके परिवारीजन दब गए।
लखनऊ
- फोटो : amar ujala
जब तक मदद मिलती, कइयों के दम टूट चुके थे। जो जिंदा बचे थे, उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे थे।
लखनऊ
- फोटो : amar ujala
जानकारी अनुसार झांसी के रहने वाले मजदूर गौर कॉन्क्लेव की दीवार की मरम्मत के लिए ही वहां रुके हुए थे। उन्होंने दीवार से सटाकर प्लास्टिक के शेड, तिरपाल व बांस से घर बना रखे थे। कुछ झोपड़े दीवार से दूर सड़क के पार बने थे, जिनमें रहने वाले दुर्घटना से बच गए थे।
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- फोटो : amar ujala
...इसलिए हुआ हादसा
गौर कॉन्क्लेव में डेढ़ सौ से अधिक सैन्य अफसर रहते हैं। इनके आवास दीवार से कुछ दूरी पर हैं। दीवार और आवास के बीच मिट्टी-जंगल है। दूसरी ओर भी जंगल है। गुरुवार को भारी बारिश के चलते मिट्टी पोली हो गई और दीवार गिरने से हादसा हो गया। दीवार की नींव काफी गहरी थी।
गौर कॉन्क्लेव में डेढ़ सौ से अधिक सैन्य अफसर रहते हैं। इनके आवास दीवार से कुछ दूरी पर हैं। दीवार और आवास के बीच मिट्टी-जंगल है। दूसरी ओर भी जंगल है। गुरुवार को भारी बारिश के चलते मिट्टी पोली हो गई और दीवार गिरने से हादसा हो गया। दीवार की नींव काफी गहरी थी।
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लखनऊ
- फोटो : amar ujala
सुबह पांच बजे घनघनाए अधिकारियों के फोन
सुबह के करीब पांच बजे थे। कमिश्नर रोशन जैकब और सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने सिविल अस्पताल को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। दुर्घटनास्थल पर मरीजों को लाने के लिए दो टीमें एंबुलेंस से रवाना की गईं। मगर एंबुलेंस से वहां से महज दो जिंदा जख्मी मजदूर अस्पताल लाए गए। दोनों की हालत खतरे से बाहर थी।
सुबह के करीब पांच बजे थे। कमिश्नर रोशन जैकब और सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने सिविल अस्पताल को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। दुर्घटनास्थल पर मरीजों को लाने के लिए दो टीमें एंबुलेंस से रवाना की गईं। मगर एंबुलेंस से वहां से महज दो जिंदा जख्मी मजदूर अस्पताल लाए गए। दोनों की हालत खतरे से बाहर थी।