श्री पारस अस्पताल के परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को शनिवार को पुलिस प्रशासन की टीम ने जब्त कर लिया। डीवीआर को फोरेंसिक साइंस लैब भेजा जाएगा। पुलिस के मुताबिक 26, 27 और 28 अप्रैल के फुटेज देखे जाएंगे। अगर, फुटेज मिलते हैं तो तीन दिन में हुई मौत, मरीजों की संख्या और वायरल वीडियो बनाने वाले से पर्दा उठ सकता है। अस्पताल में टीम एक घंटे तक मौजूद रही। श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के खिलाफ आठ जून को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें वायरल वीडियो में ऑक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया गया। वीडियो की सीडी बनाकर फोरेंसिक साइंस लैब भेजी गई। पुलिस की जांच अभी वीडियो बनाने वाले और वायरल करने वाले की तलाश में चल रही है, जबकि वीडियो में मॉकड्रिल पर कही गई बात पर ध्यान नहीं दिया गया। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से मॉकड्रिल का सच सामने आ सकता था। इस मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इस पर एसएसपी मुनिराज जी ने डीवीआर को जब्त करने के निर्देश दिए थे।
श्री पारस अस्पताल: डीवीआर खोलेगी ऑक्सीजन मॉकड्रिल का 'सच', जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा
आगरा के श्री पारस अस्पताल परिसर में 28 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसमें मुख्य गेट से लेकर रिसेप्शन, वार्ड, आईसीयू को कवर किया गया है। डीवीआर में 32 चैनल हैं। इसे डॉ. अरिन्जय जैन के केबिन में लगाया गया था। 32 चैनल के डीवीआर में 28 कैमरों की रिकॉर्डिंग हो रही थी। यह चालू हालत में है। पुलिस ने इसे चेक भी किया था। निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बालियान का कहना है कि डीवीआर से फुटेज निकालने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। हालांकि डॉ. अरिन्जय जैन ने अपने बयान में कहा था कि डीवीआर में सात दिन की रिकॉर्डिंग ही सेव रहती है। अगर, यह सच है तो फुटेज मिलना आसान नहीं होगा। फोरेंसिक टूल से डाटा रिकवर किया जाएगा।
1. फुटेज मिले तो पता चल सकता है कि 26 से 28 अप्रैल तक कितने मरीज भर्ती हुए? और कितने डिस्चार्ज किए गए? कितने मरीजों की मौत हुई?
2. अस्पताल में डॉक्टर राउंड पर आए या नहीं? मरीजों की देखभाल और इलाज कौन कर रहा था? इसमें किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई? यह फुटेज में देखा जा सकता है। कर्मचारियों के नाम पता चल जाएंगे।
3. अगर, अधिक संख्या में मरीजों की मौत हुई होगी तो अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहा होगा। फुटेज में आवाज भले ही नहीं आए, लेकिन हालात नजर आएंगे।
4. आईसीयू, ऑक्सीजन कंट्रोल केबिन और मुख्य गेट पर भी कैमरे लगे होंगे? अगर, ऑक्सीजन को लेकर मॉकड्रिल हुई होगी तो फुटेज में आएगा। किसने ऑक्सीजन बंद की? उस कर्मचारी से पूछताछ हो सकेगी?
5. अस्पताल के गेट से ही शवों को बाहर निकाला गया होगा? कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शवों को दिया जा रहा था, फुटेज में यह भी पता चलेगा कि शव कितने और कैसे निकाले गए?
6. वायरल वीडियो अस्पताल में ही बनाया गया। सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में वीडियो बनाने वाला भी नजर आएगा। उससे पूछताछ हो सकती है।
7. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि 26 अप्रैल को सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया गया था। अगर, फुटेज इसी दिन के नहीं मिलते हैं तो यह सच होगा। कैमरे बंद होने की बात फोरेंसिक जांच में सामने आ जाएगी।
8. अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर आए या नहीं? प्रशासन ने कितने सिलिंडर उपलब्ध कराएं? कितने मरीजों के परिजनों ने दिए? इसकी जानकारी भी फुटेज से मिल सकती है। सिलिंडरों को परिसर में लाया गया होगा? यह साफ हो जाएगा।
9. कैमरों की रिकॉर्डिंग को डिलीट किया गया होगा तो फोरेंसिक जांच में पता चल जाएगा? डिलीट रिकॉर्डिंग को रिकवर भी किया जा सकता है।
स्थिति का चलेगा सही पता : पीड़ित
अस्पताल के खिलाफ शिकायत करने वाले पीड़ित अशोक चावला का कहना है कि अस्पताल के अंदर मरीजों को किस हाल में रखा गया? उनकी देखभाल की गई या नहीं? वार्ड में कर्मचारी कब जाते थे? डॉक्टर कब राउंड लेते थे? यह सब फुटेज से पता चल जाएगा। कर्मचारियों के बयान और फुटेज से सही स्थिति का पता किया जा सकता है। फुटेज में जो कर्मचारी ड्यूटी पर नजर आएंगे, उनसे पूछताछ हो सकेगी। अस्पताल में मौतों का सच सामने आ जाएगा।
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