वृंदावन के विश्व विख्यात ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर एक के समीप चबूतरा धंस गया। गुरुवार को इसकी जानकारी होने के बाद मंदिर प्रबंधन ने फर्श की मरम्मत का काम शुरू कराया। फर्श को चूहों के कारण नुकसान होना माना जा रहा है। चूहों ने मंदिर के चबूतरे को अंदर से खोदकर खोखला कर दिया है। अन्य कई स्थानों से भी चबूतरे धंसने की स्थिति में हैं।
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वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर को चूहों से खतरा: खोखली की जमीन, चबूतरा धंसा, करीब 200 वर्ष पुराना है मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 18 Feb 2022 10:03 AM IST
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बांकेबिहारी मंदिर का चबूतरा धंसा
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन का बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
करीब 200 वर्ष पुराना है मंदिर
विश्व विख्यात ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर का निर्माण लगभग 200 वर्ष पूर्व कराया गया था। इसके बाद से इसके विस्तार के साथ समय-समय पर मरम्मत के कार्य होते रहते हैं। गत वर्ष कोरोना काल में मंदिर के आंगन का नव निर्माण के साथ ही दीवारों की मरम्मत का काम कराया गया था।
विश्व विख्यात ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर का निर्माण लगभग 200 वर्ष पूर्व कराया गया था। इसके बाद से इसके विस्तार के साथ समय-समय पर मरम्मत के कार्य होते रहते हैं। गत वर्ष कोरोना काल में मंदिर के आंगन का नव निर्माण के साथ ही दीवारों की मरम्मत का काम कराया गया था।
बांकेबिहारी मंदिर का चबूतरा धंसा
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि मंदिर के गेट नंबर एक के समीप चबूतरा के फर्श के धंसने के बाद जांच कराई गई, जमीन खोखली मिली है। मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया है। वैसे पूरी तरह से जांच और दुरुस्त कराने के लिए सिविल इंजीनियरों की टीम को बुलाया गया है। टीम द्वारा सर्वे कर स्थिति का पूर्ण आंकलन करने के बाद चबूतरा के जीर्णोद्धार का काम कराया जाएगा।
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पहले मंदिर के आंगन का फर्श धंसा था
- फोटो : अमर उजाला
पहले भी हो चुका है मंदिर को नुकसान
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर को पहले भी नुकसान हो चुका है। चार वर्ष पहले मंदिर के चौक में पानी के रिसाव से नुकसान हुआ था। इसके बाद मंदिर के चौक का फर्श जगह-जगह से धंसने लगी। अनहोनी की आशंका के बाद मंदिर प्रबंधन ने सिविल इंजीनियरों से चौक का निरीक्षण कराया और वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान मंदिर के चौक का नवनिर्माण कराया गया।
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर को पहले भी नुकसान हो चुका है। चार वर्ष पहले मंदिर के चौक में पानी के रिसाव से नुकसान हुआ था। इसके बाद मंदिर के चौक का फर्श जगह-जगह से धंसने लगी। अनहोनी की आशंका के बाद मंदिर प्रबंधन ने सिविल इंजीनियरों से चौक का निरीक्षण कराया और वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान मंदिर के चौक का नवनिर्माण कराया गया।
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चूहों ने खोखली की जमीन
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले मंदिर के सेवायत के द्वारा मंदिर के गर्भ गृह में पानी भरकर नौका विहार कराए जाने के कारण दीवारों से पानी का रिसाव हुआ था। इससे भी मंदिर को नुकसान हुआ। मंदिर की दीवारों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा संपूर्ण मंदिर की दीवारों पर केमिकल का लेप लगवाया गया।
मंदिर की धुलाई से रिसता है पानी
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के बाद दोपहर में होने वाली पानी की धुलाई से पानी का रिसाव होता है। इससे पुराने मंदिर के फर्श को भी नुकसान पहुंच रहा है।
मंदिर की धुलाई से रिसता है पानी
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के बाद दोपहर में होने वाली पानी की धुलाई से पानी का रिसाव होता है। इससे पुराने मंदिर के फर्श को भी नुकसान पहुंच रहा है।