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यूपी का दिहुली नरसंहार: फांसी की सजा सुनने के बाद जेल में बेचैनी भरी रही तीनों की रात, खाना भी नहीं खाया
Wed, 19 Mar 2025 02:41 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मैनपुरी
अमर उजाला नेटवर्क, मैनपुरी
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Mar 2025 02:41 PM IST
सार
Manpuri Mass Murder Case: फिरोजाबाद जिले की तहसील जसराना के गांव दिहुली में 24 दलितों की सामूहिक हत्या में कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। फांसी की सजा पाने वाले रामपाल, रामसेवक और कप्तान सिंह जिला कारागार मैनपुरी में रातभर परेशान दिखाई दिए। दिहुली कांड के दोषी रात को करवटें बदलते रहे।
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दोषियों को ले जाती पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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UP Crime News: फिरोजाबाद जिले की तहसील जसराना के गांव दिहुली में 18 नवंबर 1981 को हुई 24 दलितों की सामूहिक हत्या में मंगलवार को कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही दो दोषियों पर दो-दो लाख और एक दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट से आदेश होने के बाद पुलिस तीनों को जिला कारागार मैनपुरी ले गई। एडीजे विशेष डकैती इंदिरा सिंह की अदालत में सुबह 11.30 बजे दोषी कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को मैनपुरी जिला कारागार से भारी सुरक्षा के बीच लाया गया। इनकी पेशी के बाद 12:30 बजे करीब फिर से इनको दीवानी की अदालत में भेज दिया गया। लंच बाद कोर्ट से फिर इनकी पुकार हुई।
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
कप्तान सिंह, रामसेवक पर दो-दो लाख और रामपाल पर एक लाख जुर्माना
दोपहर 3 बजे तीनों दोषियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से रोहित शुक्ला ने तमाम दलीलें पेश करते हुए नरसंहार के साक्ष्यों और गवाही का हवाला देते हुए फांसी की मांग की। कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर 24 लोगों की हत्या के दोषी कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को फांसी की सजा सुनाई। कप्तान सिंह, रामसेवक को दो-दो लाख और रामपाल को एक लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया गया। सजा सुनते ही तीनों के चेहरों पर मायूसी छा गई। वह रोने लगे। कोर्ट के बाहर इनके परिजन भी मौजूद थे, वह भी रोने लगे। इसके बाद पुलिस ने इन्हें जेल ले जाकर दाखिल कर दिया।
दोपहर 3 बजे तीनों दोषियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से रोहित शुक्ला ने तमाम दलीलें पेश करते हुए नरसंहार के साक्ष्यों और गवाही का हवाला देते हुए फांसी की मांग की। कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर 24 लोगों की हत्या के दोषी कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को फांसी की सजा सुनाई। कप्तान सिंह, रामसेवक को दो-दो लाख और रामपाल को एक लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया गया। सजा सुनते ही तीनों के चेहरों पर मायूसी छा गई। वह रोने लगे। कोर्ट के बाहर इनके परिजन भी मौजूद थे, वह भी रोने लगे। इसके बाद पुलिस ने इन्हें जेल ले जाकर दाखिल कर दिया।
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
जेल में बेचैनी भरी रही तीनों की रात
फांसी की सजा पाने वाले रामपाल, रामसेवक और कप्तान सिंह जिला कारागार मैनपुरी में रातभर परेशान दिखाई दिए। दिहुली कांड के दोषी रात को करवटें बदलते रहे। इससे पहले सोमवार की रात को करवटें बदलते रहे। जिला कारागार के कर्मियों के अनुसार इन तीनों की नियमित निगरानी भी की जा रही थी। मंगलवार को तीनों समय से उठे और नित्य क्रिया के बाद कोर्ट जाने को तैयार हो गए। मगर तीनों बेचैन थे। सोमवार शाम को खाना भी कम ही खाया था।
फांसी की सजा पाने वाले रामपाल, रामसेवक और कप्तान सिंह जिला कारागार मैनपुरी में रातभर परेशान दिखाई दिए। दिहुली कांड के दोषी रात को करवटें बदलते रहे। इससे पहले सोमवार की रात को करवटें बदलते रहे। जिला कारागार के कर्मियों के अनुसार इन तीनों की नियमित निगरानी भी की जा रही थी। मंगलवार को तीनों समय से उठे और नित्य क्रिया के बाद कोर्ट जाने को तैयार हो गए। मगर तीनों बेचैन थे। सोमवार शाम को खाना भी कम ही खाया था।
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दिहुली नरसंहार में तीनों दोषियों को फांसी की सजा
- फोटो : अमर उजाला
फांसी की सजा दिलाने के बाद अभियोजन पक्ष में खुशी
दिहुली कांड में रामसेवक, कप्तान, और रामपाल को फांसी की सजा दिलाने के बाद अभियोजन पक्ष में खुशी है। वहीं, बचाव पक्ष अब सजा पाने वालों को फंदे से बचाने की तैयारी में है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रोहित शुक्ला ने बताया कि बेशक दोषियों की उम्र अधिक थी। मगर, वारदात सामूहिक नरसंहार की थी। इस घटना ने देश और प्रदेश को हिला दिया था। अभियोजन पक्ष के पास मजबूत गवाह, सटीक साक्ष्य थे।
दिहुली कांड में रामसेवक, कप्तान, और रामपाल को फांसी की सजा दिलाने के बाद अभियोजन पक्ष में खुशी है। वहीं, बचाव पक्ष अब सजा पाने वालों को फंदे से बचाने की तैयारी में है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रोहित शुक्ला ने बताया कि बेशक दोषियों की उम्र अधिक थी। मगर, वारदात सामूहिक नरसंहार की थी। इस घटना ने देश और प्रदेश को हिला दिया था। अभियोजन पक्ष के पास मजबूत गवाह, सटीक साक्ष्य थे।
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firozabad dihuli massacre
- फोटो : अमर उजाला
फंदे से बचने के लिए हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
इसके चलते अदालत ने इन तीनों को फांसी की सजा सुनाई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज दुबे ने बताया कि अदालत में अभियोजन के गवाह और साक्ष्यों को ही उन्होंने जिरह के दौरान गिराने की कोशिश की। दरअसल, अभियुक्तों की ओर से कोई भी गवाह नहीं बना। हालांकि, अदालत ने जो निर्णय दिया है उसका सम्मान है। मगर, कानून के तहत वह अदालत के फैसले पर अपील में इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे।
इसके चलते अदालत ने इन तीनों को फांसी की सजा सुनाई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज दुबे ने बताया कि अदालत में अभियोजन के गवाह और साक्ष्यों को ही उन्होंने जिरह के दौरान गिराने की कोशिश की। दरअसल, अभियुक्तों की ओर से कोई भी गवाह नहीं बना। हालांकि, अदालत ने जो निर्णय दिया है उसका सम्मान है। मगर, कानून के तहत वह अदालत के फैसले पर अपील में इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे।