कोरोना एक और बीमारी है। यह किसी भी हालत में हमसे मजबूत नहीं हो सकती। हौसला बनाए रखें और देखेंगे कि बीमारी हार मान जाएगी...। हमने इसे हराया है...। गंभीर संक्रमण से पूरा परिवार बिस्तर पर पहुंच गया था लेकिन अब सभी स्वस्थ हैं। आगरा में कोरोना को हराने वाले परिवारों के सदस्यों का कहना है कि मनोबल और सकारात्मक सोच सबसे बड़ी वजह हैं जो बीमारी को मात देने में आपकी सहायता करती हैं। हौसला बनाए रखें, चिकित्सकों के परामर्श से दवाएं लें। व्यायाम, प्राणायाम, शुद्ध व हल्के भोजन को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और कोरोना को दूर भगाएं।
#LadengeCoronaSe: हारेगा कोरोना...हमने इसे हराया है, पढ़ें आगरा के इन परिवारों ने कैसे जीती 'जंग'
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लक्षण दिखने पर तत्काल परामर्श लेकर जांच कराई
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल को 26 मार्च को बुखार के साथ गले में खराश महसूस हुई। बिना देरी किए उन्होंने चिकित्सक से बात की। एंटीजन जांच में कुलपति व उनके बेटे की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। दोनों अलग कमरे में आइसोलेट हो गए। आरटी-पीसीआर में भी दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पहले दिन रेमडेसिविर लगवाने के लिए एसएन जाना पड़ा। इसके बाद घर पर ही इलाज चला। सोच सकारात्मक रखी। चिकित्सक के बताए अनुसार भोजन, दवाएं लीं और आज दोनों स्वस्थ हैं।
सीख
1- चिकित्सकों की सलाह के अनुसार इलाज किया।
2- स्वामी विवेकानंद की जीवनी व अन्य प्रेरक पुस्तकें पढ़ीं।
3- बीमारी के दौरान भी काम पर ध्यान लगाए रखा।
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि अक्तूबर में वह, उनकी पत्नी डॉ. शिक्षा श्रीधर (एसोसिएट प्रोफेसर, श्रीमती बीडी जैन कॉलेज) और दोनों बेटियां डॉ. वर्तिका व वर्णिका श्रीधर एक-दो दिन के अंतराल में संक्रमित हो गए। चिकित्सक बेटी की सलाह पर छोटी बेटी बाजार से दवा लाती थी। पत्नी व दोनों बेटियां सात-आठ दिन बाद कोरोना के लक्षणों से मुक्त हो गईं। प्रो. श्रीधर का संक्रमण बढ़ गया। उन्हें एसएमएस, जयपुर में भर्ती कराया गया। ऑक्सीजन स्तर 80 तक पहुंच गया। दस दिन तक ऑक्सीजन पर रहे। इस दौरान बेटियों ने जो मोटिवेशन की खुराक दी, उससे बड़ा बल मिला। दोनों बेटियों ने हॉस्पिटल के पास ही एक होटल में कमरा ले लिया। ठीक होने तक वहीं रहीं। चार नवंबर को सभी साथ लौटे।
सीख
1- डाइट में प्रोटीन बढ़ा दिया। कच्चा पनीर, अंकुरित दाल, काले चने का सूप पिया।
2- व्यायाम व प्राणायाम अभी तक नियमित रूप से कर रहे हैं।
3- ठीक होने के बाद सावधानी और बढ़ा दी। घर के बाहर डबल मास्क लगाते हैं।
प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल के निदेशक और अप्सा के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता (68 वर्ष) के परिवार के पांच सदस्य एकसाथ संक्रमित हुए। सभी ने होम आइसोलेशन में रहकर इलाज किया। हौसला नहीं छोड़ा। उनके पिता सतीश चंद गुप्ता (93 वर्ष), सास सावित्री देवी (87 वर्ष), पत्नी सुनीता गुप्ता (64 वर्ष) पुत्रवधू ईशा गुप्ता (33 वर्ष) संक्रमण की चपेट में आए। डॉ. सुशील गुप्ता का कहना है कि धैर्य से काम लेते हुए सभी ने सोच सकारात्मक बनाए रखी। योग और प्राणायाम नियमित रूप से किया। चिकित्सक के बताए अनुसार, पौष्टिक आहार लिया, अब सभी स्वस्थ हैं।
सीख
1- परिवार के सदस्य एक-दूसरे को हौसला देते रहे।
2- चिकित्सक के अनुसार शुद्ध और हल्का भोजन किया।
3- घर में भी सामाजिक दूरी का पालन किया गया।
मुफीद-ए-आम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामलखन यादव ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चपेट में आने के बाद उनका ऑक्सीजन का स्तर 93 तक पहुंच गया। अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रयास किया। जगह नहीं मिल पाई। घर पर भी ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था नहीं हो पाई। इसके बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ी। चिकित्सक की सलाह पर घर पर इलाज शुरू किया। प्राणायाम किया। घर के लॉन में पेड़ के नीचे योग करते। अब ऑक्सीजन का स्तर 98 तक आ गया है। पत्नी की लगन और शुभचिंतकों के संदेश से मनोबल बढ़ा।
सीख
1- योग किया। प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करते रहे।
2- पेड़ के नीचे ही रोजाना करीब दो घंटे समय बिताया।
3- मन में नकारात्मक भाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया।