आगरा के इरादतनगर के कुर्राचित्तरपुर स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंटर कॉलेज में सोमवार सुबह 8:45 बजे यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा में फर्जी सचल दल पहुंच गया। उनकी बोलेरो गाड़ी पर भारत सरकार जिला मजिस्ट्रेट एनसीआरबी लिखा था। सूट-बूट में नेमप्लेट लगाकर आए चार लोगों ने खुद को मजिस्ट्रेट बताया। केंद्र व्यवस्थापक के मांगने पर अधिकार पत्र नहीं दिखाने और एनसीआरबी का फुल फॉर्म नहीं बताने पर डीआईओएस और पुलिस को सूचना दी गई। पूछताछ में चारों की पोल खुल गई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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आए थे मजिस्ट्रेट बनकर, पहुंच गए जेल: एनसीआरबी की फुल फॉर्म में फंसे जालसाज, निकले 8वीं-12वीं पास
Mon, 04 Apr 2022 09:12 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 04 Apr 2022 09:12 PM IST
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आगरा में पकड़ा गया फर्जी सचल दल
- फोटो : अमर उजाला
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डीआईओएस से बात करते पुलिस अधिकारी
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थानाध्यक्ष अवधेश गौतम ने बताया कि रघुवीर शादीशुदा नहीं है। घर से अलग रहता है। उसने देवेंद्र, मुकेश और अशोक को लालच दिया था कि वह तीन महीने उसके साथ मिलकर काम कर लें। इसके बाद वो 18 हजार रुपये प्रतिमाह देगा। उनके आईडी कार्ड बनवाए थे। पुलिस की पूछताछ में आरोपी देवेंद्र और मुकेश ने बताया कि रघुवीर ने कहा था कि वह शराब, सट्टा और किसी तरह की सूचना दें। वह छापा मारेगा। इसके उन्हें कीमत भी देगा। इस पर वो राजी हो गए।
पकड़े गए चारों आरोपी
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स्कूल पर छापा मारने की योजना भी रघुवीर की थी। इसके लिए गाड़ी भी खरीदी थी। नेम प्लेट भी खरीदी। दस हजार रुपये में कपड़े सिलवाए थे। अन्य आरोपियों ने बताया कि रघुवीर ने कहा था कि एक निजी स्कूल में जाएंगे। वहां गड़बड़ी मिलेगी तो वसूली करेंगे। इसके बाद और भी स्कूलों में छापेमारी करेंगे। रघुवीर से जब भी पुलिस कुछ पूछने लगती है, वह खुद को बीपी का मरीज बताने लगता है। इससे पुलिस उससे पूछताछ करने में कतरा रही है।
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गाड़ी पर लिखाया जिला मजिस्ट्रेट
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एसएसपी ने किया सवाल-एनसीआबी की फुलफार्म क्या है?
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों के पकड़े जाने के बाद उन्होंने फोन पर बात की। रघुवीर से पूछा कि यह एनसीआरबी क्या होता है? उसने बताया कि यह न्यू दिल्ली क्राइम ब्रांच है। इसके बाद अन्य आरोपी भी इसी तरह के गलत जवाब देने लगे, जबकि एनसीआरबी का मतलब नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो होता है। इसमें अपराध का आंकड़ा रखा जाता है। इससे शक होने पर आरोपियों को थाने ले जाया गया।
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आरोपियों ने फाइनेंस पर खरीदी गाड़ी
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