कोरोना आपदा के दौरान ऑक्सीजन सिलिंडर के वितरण में फर्जीवाड़ा हुआ। ऑक्सीजन नहीं मिलने से अस्पतालों को नो ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा करने पड़े। उस संकट में ऑक्सीजन रीफिलिंग प्लांट से अस्पतालों के नाम पर फर्जी आपूर्ति का खेल चला। प्रशासन को इसकी खबर पांच अस्पतालों के नाम पर हुए 810 सिलिंडर के फर्जीवाड़े के बाद हुई। सिलिंडर कहां गए, कौन ले गया, इन सवालों के जवाब जिला प्रशासन के पास आज भी नहीं हैं। सिलिंडर वितरण का काम एसडीएम, तहसीलदार व अन्य प्रशासनिक अधिकारी संभाल रहे थे। 44 दिन बाद भी फर्जीवाड़े के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। पांच नॉन कोविड अस्पतालों में 30 अप्रैल से चार मई तक 810 सिलिंडर की आपूर्ति की गई। अस्पताल संचालकों ने आपूर्ति नहीं होने की बात कही। आपूर्ति में फर्जीवाड़े की आशंका जताई। जिलाधिकारी ने जांच कराई, तो पता चला कि अस्पतालों के नाम पर फर्जी सिलिंडर दर्ज हो गए। उन्हें सिलिंडर ही नहीं मिले। खुद को घिरता देख प्रशासन ने जांच ठंडे बस्ते में डाल दी। 44 दिन बाद भी जिला प्रशासन ने अस्पतालों को आपूर्ति हुए सिलिंडर का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। न फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
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शर्मनाक: आपदा में ऑक्सीजन सिलिंडर वितरण में हुआ था फर्जीवाड़ा, आगरा प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई
Tue, 22 Jun 2021 10:57 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 22 Jun 2021 10:57 AM IST
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ऑक्सीजन प्लांट में सिलिंडर भरता कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने के लिए घंटों खड़े रहे लोग (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
15 दिन तक हुई मनमानी
20 अप्रैल से पांच मई तक 15 दिनों तक ऑक्सीजन प्लांट पर आपूर्ति में मनमानी होती रही। 30 अप्रैल से 4 मई तक 810 सिलिंडर का फर्जीवाड़ा हुआ। इससे पहले अस्पतालों को कितने सिलिंडर भेजे गए अगर उनकी जांच हो तो और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
20 अप्रैल से पांच मई तक 15 दिनों तक ऑक्सीजन प्लांट पर आपूर्ति में मनमानी होती रही। 30 अप्रैल से 4 मई तक 810 सिलिंडर का फर्जीवाड़ा हुआ। इससे पहले अस्पतालों को कितने सिलिंडर भेजे गए अगर उनकी जांच हो तो और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
ऑक्सीजन सिलिंडर के इंतजार में खड़े लोग (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
पांच मई को लगाईं थीं ड्यूटियां
एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने पांच मई को सिकंदरा व टेढ़ी बगिया प्लांट से ऑक्सीजन आपूर्ति की 24 घंटे निगरानी के लिए आठ टीमें बनाई। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक एक प्लांट पर प्रशासन और आईएमए के चार सदस्यों की संयुक्त ड्यूटी लगाई। इससे पहले 24 घंटे प्लांट पर निगरानी की व्यवस्था नहीं थी। आशंका है इसका फायदा उठाकर बिचौलियों ने सिलिंडर की कालाबाजारी कराई।
एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने पांच मई को सिकंदरा व टेढ़ी बगिया प्लांट से ऑक्सीजन आपूर्ति की 24 घंटे निगरानी के लिए आठ टीमें बनाई। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक एक प्लांट पर प्रशासन और आईएमए के चार सदस्यों की संयुक्त ड्यूटी लगाई। इससे पहले 24 घंटे प्लांट पर निगरानी की व्यवस्था नहीं थी। आशंका है इसका फायदा उठाकर बिचौलियों ने सिलिंडर की कालाबाजारी कराई।
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ऑक्सीजन सिलिंडर
- फोटो : अमर उजाला
इन अस्पतालों को हुई थी आपूर्ति
- लाइफलाइन हॉस्पिटल, सिकंदरा - 161 सिलिंडर
- कबीरदेव हॉस्पिटल, ट्रांसयमुना - 95 सिलिंडर
- श्रीजी हॉस्पिटल, कालिंदी विहार -274 सिलिंडर
- सदाशिव हॉस्पिटल, रामबाग - 200 सिलिंडर
- मेट्रो हॉस्पिटल, कमला नगर - 80 सिलिंडर
- लाइफलाइन हॉस्पिटल, सिकंदरा - 161 सिलिंडर
- कबीरदेव हॉस्पिटल, ट्रांसयमुना - 95 सिलिंडर
- श्रीजी हॉस्पिटल, कालिंदी विहार -274 सिलिंडर
- सदाशिव हॉस्पिटल, रामबाग - 200 सिलिंडर
- मेट्रो हॉस्पिटल, कमला नगर - 80 सिलिंडर
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अस्पताल के गेट पर चस्पा ऑक्सीजन खत्म होने का नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
34 अस्पतालों ने लगाए थे नोटिस
संक्रमण की दूसरी लहर में 46 कोविड अस्पताल थे। 21 से 28 अप्रैल तक 34 अस्पतालों ने नो ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा किए थे। मरीजों को भर्ती नहीं करने पर जिलाधिकारी ने 20 हॉस्पिटलों को कोविड सूची से डिबार किया था।
संक्रमण की दूसरी लहर में 46 कोविड अस्पताल थे। 21 से 28 अप्रैल तक 34 अस्पतालों ने नो ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा किए थे। मरीजों को भर्ती नहीं करने पर जिलाधिकारी ने 20 हॉस्पिटलों को कोविड सूची से डिबार किया था।