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पुलवामा शहीद की बरसी: शहादत का बीता साल, यादों में जिंदा विनायकपुर का लाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 14 Feb 2020 12:08 AM IST
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शहीद रामवकील
- फोटो : अमर उजाला
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पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले में मैनपुरी के सीआरपीएफ जवान रामवकील शहीद हो गए थे। उनकी शहादत को पूरा एक साल हो चुका है। शहीद को याद कर परिवार और गांव के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। तो आंखों की नमी उनके बिछड़ने का अहसास भी कराती हैं।
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शहीद रामवकील की पत्नी गीता देवी
शहीद की मांग अमितश्री अपने बेटे को याद करके रो पड़ती हैं। आखिर उन्होंने कलेजे का टुकड़ा जो खोया है। पत्नी गीता देवी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। बरसी पर शहीद पति को याद करते हुए वीर नारी फफक पड़ीं। गीता देवी इटावा में रहकर बच्चों की परवरिश कर रही हैं।
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शहीद रामवकील
शहीद रामवकील की बरसी पर गांव विनायकपुर में शहीद मेले का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि पुलवामा हमले की बरसी पर एक दिवसीय मेले का आयोजन होगा। इसमें गांव व क्षेत्र के लोग प्रतिभाग करेंगे। साल दर साल इसका आयोजन किया जाएगा।
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शहीद स्मारक को नहीं है रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
नहीं हो सका शहीद स्मारक का निर्माण
रामवकील की शहादत के एक साल बाद भी स्मारक का निर्माण तक नहीं हो सका। सरकार द्वारा इसके लिए पांच बीघा का पट्टा तो आवंटित किया जा चुका है, लेकिन इसके लिए अब तक रास्ता नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक इस मामले की जानकारी दी गई, लेकिन निराकरण नहीं हो सका।
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शहीद की पत्नी और मां
- फोटो : अमर उजाला
शहीद की मां अमितश्री ने बताया कि बेटे को खोने का गम है, तो गर्व इस बात का है कि मेरे बेटे ने भारत मां की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। वह हमारे दिल में हमेशा जीवित रहेगा। पत्नी गीता देवी ने कहा कि मेरे पति ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। सरकार से मेरा अनुरोध है कि शहीद स्मारक के लिए रास्ता दिलाया जाए।
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