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सीमा पर जवान शहीदः बड़े भाई बोले, मेरी गोदी में खेलता छोड़ चल बसे थे माता-पिता
Tue, 19 Nov 2019 12:21 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 19 Nov 2019 12:21 AM IST
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संतोष कुमार सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार की शाम सेना की यूनिट ने परिजनों को संतोष कुमार सिंह भदौरिया के आईडी ब्लास्ट में घायल होने की खबर दी। परिजन उनकी सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने लगे। रात करीब 9:30 बजे एसडीएम बाह अवधेश श्रीवास्तव ने घर आकर संतोष कुमार सिंह की शहादत की खबर दी। सुनते ही परिजनों की आंखों से आंसू गिरने लगे। जिसने भी शहादत की खबर सुनी, उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। गांव में संतोष कुमार सिंह की बहादुरी के किस्से एक दूसरे से साझा कर लोगों की आंखें सजल हो उठी।
शहीद संतोष कुमार सिंह भदौरिया
- फोटो : अमर उजाला
शहीद संतोष कुमार सिंह भदौरिया को माता-पिता बचपन में ही चल बसे थे। भाई लालजी सिंह और भाभी सुमन की गोद में खेल कूदकर बडे़ हुए संतोष सेना में भर्ती होने के जुनून में चंबल की तलहटी में खूब दौड़ा करते थे। पहले ही प्रयास में कामयाब भी हुए थे। पुरा भदौरिया गांव के शंकर सिंह के बेटे संतोष कुमार सिंह का जन्म 1979 में हुआ था। उन्हें एक साल का छोड़कर 1980 में शंकर सिंह चल बसे। 5 साल के हुए तो मां बिट्टा देवी भी स्वर्गवासी हो गईं। संतोष कुमार सिंह अपने बड़े भाई लालजी सिंह और भाभी सुमन की गोद में पले बढ़े।
शहीद संतोष कुमार सिंह भदौरिया व बड़े भाई
- फोटो : अमर उजाला
बड़े भाई लालजी सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों भाइयों दिनेश सिंह और संतोष कुमार सिंह की परिवरिश की थी। बीहड़ की पगडंडी पर उछल कूद करने वाले संतोष कुमार सिंह बार्डर पर होने वाले हमले पर कहते थे कि एक दिन वह पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। शहादत की खबर पर लालजी सिंह और दिनेश सिंह ने कहा कि भाई ने परिवार का मान बढ़ाया है। भाई खोने का गम है, लेकिन शहादत पर गर्व है। चाचा रविंद्र सिंह ने संतोष कुमार सिंह की शहादत पर दुख जताते हुए कहा कि देश के लिए कुर्बान हुए बेटे के बलिदान पर जन्म देने वाले माता-पिता भी स्वर्ग में गौरवांवित होंगे।
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संतोष कुमार सिंह की भतीजी
- फोटो : अमर उजाला
यूं तो संतोष कुमार सिंह की शहादत से पूरे परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट पडा है। पर, संतोष कुमार सिंह की भतीजी वर्षा और गौरी की आंखों में क्रोध की आग धधक रही है। दोनों बोली कि पाकिस्तान की कायराना हरकत में उनके चाचू की जान गई है। एलओसी पर फेसिंग के पास बिछाई गई आईडी के ब्लास्ट में चाचू की जान लेने वाले पाकिस्तान को सरकार उसके किए की सजा दे। हम भी चाचू के बलिदान का बदला लेने के लिए सेना में भर्ती होना चाहते हैं। दोनों भतीजी चाचा से जुड़ी यादों के साथ फूट फूट कर रो पड़ती हैं। उन्हें संभालने वाले भी अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
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शहादत की जानकारी के बाद संतोष कुमार का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
शहीद संतोष कुमार सिंह की पत्नी विमला देवी अपनी बेटी दीक्षा (17), प्रिया (14), बेटे अभय प्रताप सिंह (12) के साथ आगरा में रहती हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने आगरा को चुना है। शुक्रवार को अभय प्रताप सिंह का बर्थ डे था। संतोष कुमार सिंह ने उसे बर्थ डे विश कर सेना का अफसर बनाने के लिए विमला देवी को खूब तैयारी कराने के लिए बोला था। बेटे ने ताऊ और ताई द्वारा बर्थ डे विश न करने की बात अपने भाई और भाभी को बताई थी। तभी संतोष कुमार सिंह ने दो दिन बाद उदयपुर में पोस्टिंग होने की जानकारी दी थी।