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कोरोना से जंग के 'नायक': ऑक्सीजन संकट की वो रात..., तीन लोगों ने बचाईं 200 जिंदगियां

Mon, 17 May 2021 12:27 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 17 May 2021 12:27 AM IST
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three real life heroes save 200 lives amid oxygen crisis in agra
नायक: ऑक्सीजन टैंकर चालक देवेश गौतम, डॉ. संजय चतुर्वेदी और रिफाइनरी के प्रवर्तन निदेशक एके मैत्री - फोटो : अमर उजाला

वो रात...जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर आगरा में चरम पर थी। कोरोना संकट के बीच ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा था। अस्पतालों में भर्ती करीब 200 मरीज जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। उस 27 व 28 अप्रैल की रात में शहर के 14 अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। उस रात को न जिलाधिकारी सोये और न कमिश्नर। जिलाधिकारी खुद ऑक्सीजन के इंतजाम के लिए दौड़ते रहे। इस बीच जिलाधिकारी के पास फोन कॉल आया। यह कॉल एक ऑक्सीजन टैंकर चालक ने किया। चालक ने ऐसी जानकारी दी, जिससे उम्मीद बंधी। इसके बाद ऑक्सीजन टैंकर चालक, आईएमए के पूर्व सचिव और रिफाइनरी के प्रवर्तन निदेशक के सहयोग से सांसें गिन रहीं 200 जिंदगियों की जान बचाई जा सकी। अगली स्लाइड्स में पढ़िए इन तीन नायकों की कहानी....




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three real life heroes save 200 lives amid oxygen crisis in agra
ऑक्सीजन प्लांट में जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कहा कि वो रात बड़ी भयानक थी। रातभर मेरा फोन बजता रहा। ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए इधर-उधर दौड़ता रहा। कहीं से ऑक्सीजन मिल जाए तो मरीज बच जाएं। अचानक मेरे पास ऑक्सीजन टैंकर चलाने वाले चालक देवेश गौतम का फोन आया।

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ऑक्सीजन टैंकर चालक देवेश गौतम (बायें), जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह (दायें) - फोटो : अमर उजाला
चालक देवेश गौतम ने बताया कि मथुरा रिफाइनरी में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) उपलब्ध है। ये बात खुद रिफाइनरी अधिकारियों को नहीं पता थी। मैंने वहां प्रवर्तन निदेशक एके मैत्री से बात की, तो उन्होंने कहा कि एलएमओ उपलब्धता की मुझे जानकारी नहीं। मैंने उनसे कहा, मेरी जानकारी बिल्कुल सही है आप चेक करिए। 
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प्रवर्तन निदेशक एके मैत्री - फोटो : अमर उजाला
रिफाइनरी के अधिकारियों ने चेक किया तो एलएमओ मिल गई। रात में ही देवेश 3000 लीटर क्षमता का टैंकर लेकर रिफाइनरी पहुंचा। वहां एके मैत्री ने ही अपने उपकरण देकर टैंकर को भरवाया।
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आईएमए पूर्व सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला
इधर, अस्पताल संचालकों से लेकर मरीजों के तीमारदारों को आईएमए पूर्व सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने संभाला। उन्होंने अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से मरीजों की सांसों की डोर नहीं टूटने दी। सुबह पांच बजे से पहले टैंकर आया, जिसे हमने आठ बड़े अस्पतालों में बांटा। यहां 150 से अधिक गंभीर मरीज थे, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी। 
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