कोरोना संक्रमण में ठीक दो साल पहले 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और फिर अगले दिन 23 मार्च से लॉकडाउन शुरू हो गया था। इन दो वर्षों में लॉकडाउन ने ताजनगरी के चार लाख लोगों को रोजगार देने वाले जूता उद्योग और 3.50 लाख लोगों की रोजीरोटी चलाने वाले पर्यटन उद्योग की कमर तोड़कर रख दी। हर दिन कमाने, खाने वाले लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए। अब दो साल बाद जूता उद्योग तो धीमे धीमे पटरी पर लौट आया है, लेकिन पर्यटन उद्योग अब भी सहमा है। हर बार कोरोना संक्रमण बढ़ने पर ताजमहल की बंदी पर्यटन को उड़ान नहीं भरने दे रही। आगरा-मुंबई की फ्लाइट बंद होने का भी असर पड़ा है।
{"_id":"623af94fae979028773bcf1a","slug":"two-years-of-lockdown-agra-shoe-industry-growing-up-but-tourism-still-faces-difficulties","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन के दो साल: ताजनगरी में जूता उद्योग ने पकड़ी रफ्तार, पर्यटन में अभी भी मुश्किलें बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन के दो साल: ताजनगरी में जूता उद्योग ने पकड़ी रफ्तार, पर्यटन में अभी भी मुश्किलें बरकरार
Wed, 23 Mar 2022 04:25 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 23 Mar 2022 04:25 PM IST
विज्ञापन
ताजमहल में ऐसे गिरा और उठा सैलानियों का ग्राफ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ताजमहल के टर्न स्टाइल गेट पर खड़ीं महिला कर्मचारी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
17 मार्च 2020 को ताजमहल के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद हो गए जो 21 सितंबर को जाकर खुले। इसके बाद सैलानियों की संख्या ढाई हजार तक सीमित कर दी गई जो बाद में बढ़ी पर फिर से बीते साल अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर आ गई। विदेशी उड़ानें बंद थी तो पूरा दारोमदार भारतीय पर्यटकों पर आ गया, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में फिर से ताज के दरवाजे बंद हो गए तो फैक्ट्ररियों में उत्पादन कम हो गया। 16 अप्रैल 2021 से 16 जून तक ताज के दरवाजे फिर बंद हुए तो पर्यटन उद्योग की रही सही उम्मीदें भी दम तोड़ गईं। लॉकडाउन के इन दो सालों में ताज पर्यटकों के लिए 248 दिनों तक बंद रहा।
फुटवियर शॉप
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी बाजार ने दिया जूता उद्योग को दम
देश की 65 फीसदी जरूरतें और निर्यात में 27 फीसदी की हिस्सेदारी लिए जूता उद्योग ने दो साल बाद रफ्तार पकड़ ली है। लॉकडाउन के बाद दो तिमाही तक जूता उद्योग बुरी तरह से पिछड़ गया। दुनिया भर के बाजारों से ऑर्डर न मिलने से जूता निर्यातक और इससे जुड़े चार लाख लोग परेशान रहे, पर नए बाजारों की तलाश और चीन के विकल्प के रूप में भारतीय निर्यातकों ने जगह जमाई, जिस वजह से लेदर उद्योग फिर से निर्यात के उसी आंकड़े को छूने के कगार पर है जो लॉकडाउन से पहले 2019 में था। तब आगरा से जूता निर्यात 3378 करोड़ रुपये का था जो इस साल 3600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
80 लाख से 8 लाख रह गए पर्यटक
इन दो वर्षों ने पर्यटन की तस्वीर बिगाड़ दी। लॉकडाउन से पहले ताजमहल के दीदार के लिए 80 लाख भारतीय और 8 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक आते थे, जिनसे सालाना 2500 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा था। लॉकडाउन के बाद पहले साल भारतीय पर्यटकों की संख्या 8 लाख भी नहीं रही। विदेशी पर्यटक 8 लाख से घटकर 30 हजार तक रह गए। पहले लॉकडाउन के बाद ताज में 21 सितंबर को केवल 2300 सैलानी आए, जबकि उससे पहले ताज पर हर दिन 25 हजार सैलानी पहुंचते थे।
विज्ञापन
ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना
- फोटो : अमर उजाला