लॉकडाउन अभी खत्म नहीं हुआ है लेकिन, चार सप्ताह बाद सोमवार को सरकारी दफतर खुले तथा चहल-पहल बढ़ गई। हालांकि, कर्मचारियों की उपस्थिति एक तिहाई ही रही। उनमें भी कोरोना वायरस को लेकर भय रहा तथा दिन भर इस बीमारी की ही चर्चा होती रही। विकास भवन में सीढ़ी, रेलिंग आदि के साथ हर कक्ष एवं चेयर को सैनिटाइज किया गया। इसके बाद भी कहां हाथ रखें, कहां नहीं, फाइलों को छूने आदि को लेकर कर्मचारी अतिरिक्त सतर्कता बरतते दिखाई दिए।
प्रयागराजः चार सप्ताह बाद खुले दफ्तर, हर कक्ष, पिछले वित्तीय वर्ष के बजट की फाइलें हुईं दुरुस्त
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विकास भवन परिसर में 24 विभाग हैं, जहां कुल कर्मचारियों की संख्या करीब 500 है। सभी विभागाध्यक्षों की ओर से अलग-अलग आदेश जारी करके 33 प्रतिशत कर्मचारियों को बुलाया गया था। विभागाध्यक्षों की ओर से यह आदेश भी जारी कर दिया गया है कि किस दिन किन्हें आना है। इस आदेश की प्रति और परिचय पत्र ही कर्मचारियों का पास है। हालांकि, कृषि, उद्यान, पंचायती राज समेत कई विभाग आवश्यक सेवाओं में शामिल रहे और बंदी के दौरान भी इनमें जरूरी काम हुए।
चूंकि, लॉकडाउन पिछले वित्तीय वर्ष के खत्म होने से एक सप्ताह पहले ही लागू हो गया था। ऐसे में पहले दिन पिछले वित्तीय के बजट का लेखाजोखा तथा फाइलों को दुरुस्त करने में बीता। साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट और योजनाओं पर चर्चा हुई। इनके अलावा अन्य विभागाध्यक्षों की ओर से प्राथमिकता के आधार पर काम की सूची भी उपलब्ध कराई गई। उधर, उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह ने डीएम और सीडीओ से पत्र के माध्यम से सरकारी कार्यालयों के नियमित सैनिटाइजेशन, सफाई आदि की मांग की।
पहुंचे गए आम लोग
सरकारी कार्यालय सोमवार से खुल जरूर गए लेकिन, आमलोगों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। किसी तरह की सुनवाई भी नहीं होगी। इसके बावजूद विकास भवन में कई लोग काम लेकर पहुंचे थे। दिन में करीब साढ़े ग्यारह बजे दो बुजुर्ग महिलाएं तो रिक्शे से पहुंच गईं थीं। उनका पेंशन से संबंधित काम था।
शर्तों के साथ उद्योगों को खोलने की अनुमति, 15 आवेदन
सोमवार को सभी उद्योग को चालू करने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, सिर्फ उत्पादन वाली इकाइयों को ही अनुमति दी गई है, वह भी कई पाबंदियों के साथ। इन पाबंदियों के साथ नैनी औद्योगिक क्षेत्र तथा तेलियरगंज की 15 कंपिनयों ने उत्पादन शुरू करने के लिए आवेदन भी कर दिया है।
डीएम भानु चंद्र गोस्वामी की अगुवाई में सोमवार को कारखाने शुरू करने पर चर्चा हुई। तय हुआ कि कर्मचारियों को कार्यालय परिसर में ही रखने की व्यवस्था करनी होगी या फिर उन्हें लाने और घर पहुंचाने के लिए बस का इंतजाम करना होगा। कर्मचारियों को अलग-अलग पास जारी नहीं किए जाएंगे। कारखाना के मालिक और एक वाहन के लिए ही पास जारी होगा। कोई कर्मचारी फैक्ट्री परिसर के बाहर भी नहीं निकलेगा।