फरिश्तों को किसी ने नहीं देखा, लेकिन बागपत के इरफान, नौशाद और शरीफ उन लोगों के लिए फरिश्तों से कम नहीं हैं, जो यमुना में डूब रहे थे, लेकिन ये तीनों दोस्त नदी की लहरों से डूबते लोगों को बाहर निकाल लाए। पिछले 20 सालों में ये करीब 300 लोगों की जान बचा चुके हैं।
उम्मीद की मशाल: फरिश्तों जैसा है इन तीन दोस्तों का काम, अब तक बचा चुके हैं 300 की जान
अब तो किसी के डूबने पर आसपास के जिलों की पुलिस भी इन्हें बुलाती है। कई बार ऐसे मौके आए, जब जान बचाने के बदले परिजनों ने पैसा देने की कोशिश की लेकिन इन्होंने इनकार कर दिया। परिवार का गुजारा करने के लिए मजदूरी करते हैं। ये कहते हैं कि किसी की जिंदगी बचाकर बड़ी खुशी मिलती है। ज्येष्ठ दशहरा व पूर्णिमा या कोई अन्य स्नान पर्व होता है तो ये खुद ही यमुना पर पहुंच जाते हैं।
यमुना टापू पर बाढ़ में फंसे 106 लोगों की बचाई थी जान
वर्ष 2013 में यमुना में काफी कम पानी था और किसान शाम को यमुना के बीच में अपने खेतों में काम कर रहे थे। तभी यमुना में अचानक तेज पानी आ गया और करीब 106 किसान रेत के टापुओं पर फंस गए।
तब इन तीनों दोस्तों को पुलिस अपने साथ लेकर गई और तब पूरी रात किसानों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। इन तीनों ने किसानों को ट्यूब पर बैठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
काठा नाव हादसे में दस को जिंदा बचाया
इसी तरह साल 2017 में काठा में नाव हादसा हुआ। इस दौरान इन तीनों दोस्तों ने दस लोगों को डूबने से बचाया था।
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मुझे बचाकर दूसरा जन्म दिया
बागपत के पुराने कस्बे का रहने वाले इश्तखार (43) के यमुना किनारे खेत हैं। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल पहले वह यमुना में डूब रहे थे, तभी इरफान उसके लिए फरिश्ता बनकर आया और उसे डूबने से बचाया। उस समय मेरी शादी भी नहीं हुई थी। आज वह बच्चों के साथ हंसी-खुशी रहता है तो यह इरफान की वजह से।
देशराज मोहल्ले का उमर भी करीब 18 साल पहले डूब गया था। उसे तीनों दोस्तों ने बचाया था। उमर कहता है कि यमुना में डूबते हुए जब मुझे तीनों ने बचाया तो वह मेरे लिए दूसरे जन्म की तरह था।
