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उम्मीद की मशाल: फरिश्तों जैसा है इन तीन दोस्तों का काम, अब तक बचा चुके हैं 300 की जान  

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 02 May 2022 03:48 PM IST
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these three friends are like angels, have saved more than three hndred lives so far
तीन दोस्त - फोटो : amar ujala

फरिश्तों को किसी ने नहीं देखा, लेकिन बागपत के इरफान, नौशाद और शरीफ उन लोगों के लिए फरिश्तों से कम नहीं हैं, जो यमुना में डूब रहे थे, लेकिन ये तीनों दोस्त नदी की लहरों से डूबते लोगों को बाहर निकाल लाए। पिछले 20 सालों में ये करीब 300 लोगों की जान बचा चुके हैं। 



मोहल्ला देशराज के रहने वाले इरफान, नौशाद, शरीफ बीस साल पहले यमुना किनारे अपने पशुओं को चराने के लिए जाते थे, दिनभर वहां रहने के दौरान पहले तैरना सीख और फिर गोता मारना सीख गए। अब किसी को डूबते देखते हैं, अपनी जिंदगी की परवाह किए बगैर उसे बचाने के लिए कूद पड़ते हैं। तीनों के इस जज्बे को देखते हुए पुलिस व प्रशासन अधिकारियों ने कई बार इन्हें सम्मानित भी किया है। आगे पढ़ें इन दोस्तों की दिलेरी की कहानियां और कैसे इन तीन दोस्तों ने लोगों को नई जिंदगी दी है।

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तीन दोस्त - फोटो : amar ujala

अब तो किसी के डूबने पर आसपास के जिलों की पुलिस भी इन्हें बुलाती है। कई बार ऐसे मौके आए, जब जान बचाने के बदले परिजनों ने पैसा देने की कोशिश की लेकिन इन्होंने इनकार कर दिया। परिवार का गुजारा करने के लिए मजदूरी करते हैं। ये कहते हैं कि किसी की जिंदगी बचाकर बड़ी खुशी मिलती है। ज्येष्ठ दशहरा व पूर्णिमा या कोई अन्य स्नान पर्व होता है तो ये खुद ही यमुना पर पहुंच जाते हैं।

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डूबने से बचाए गए इश्तखार - फोटो : amar ujala

यमुना टापू पर बाढ़ में फंसे 106 लोगों की बचाई थी जान
वर्ष 2013 में यमुना में काफी कम पानी था और किसान शाम को यमुना के बीच में अपने खेतों में काम कर रहे थे। तभी यमुना में अचानक तेज पानी आ गया और करीब 106 किसान रेत के टापुओं पर फंस गए।
 

तब इन तीनों दोस्तों को पुलिस अपने साथ लेकर गई और तब पूरी रात किसानों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। इन तीनों ने किसानों को ट्यूब पर बैठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

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तीन दोस्त - फोटो : amar ujala

काठा नाव हादसे में दस को जिंदा बचाया
इसी तरह साल 2017 में काठा में नाव हादसा हुआ। इस दौरान इन तीनों दोस्तों ने दस लोगों को डूबने से बचाया था। 
 

यह भी पढ़ें: मर्डर: सिरफिरे ने दुष्कर्म के विरोध में छात्रा को घर में घुसकर दी खौफनाक मौत, हत्या के बाद शव के साथ..

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डूबने से बचाए गए उमर परिवार के साथ - फोटो : amar ujala

मुझे बचाकर दूसरा जन्म दिया 
बागपत के पुराने कस्बे का रहने वाले इश्तखार (43) के यमुना किनारे खेत हैं। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल पहले वह यमुना में डूब रहे थे, तभी इरफान उसके लिए फरिश्ता बनकर आया और उसे डूबने से बचाया। उस समय मेरी शादी भी नहीं हुई थी। आज वह बच्चों के साथ हंसी-खुशी रहता है तो यह इरफान की वजह से।  
 

देशराज मोहल्ले का उमर भी करीब 18 साल पहले डूब गया था। उसे तीनों दोस्तों ने बचाया था। उमर कहता है कि यमुना में डूबते हुए जब मुझे तीनों ने बचाया तो वह मेरे लिए दूसरे जन्म की तरह था। 

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