आयुष परिवार ही नहीं, बल्कि घर के आसपास में सभी सभी का दुलारा था। वह हमेशा खुद हंसता रहता था तो सभी को हंसाता था। लेकिन माता-पिता को नहीं पता था कि उनको हंसाने वाला बेटा उनको रोता हुआ छोड़कर चला जाएगा। बेटे की मौत के गम में मां का बुरा हाल है। वहीं मासूम की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा है और लोगों की आंखों में आंसू छलक उठे।
चमरावल के रहने वाले आयुष के पिता अरुण त्यागी खेती के साथ ही दुकान भी करते है। उनकी पत्नी रश्मि ग्रहणी है और उनकी आठ वर्षीय बेटी किट्टू उर्फ शिवन्या है, जबकि छह वर्षीय आयुष था और दो वर्षीय छोटा बेटा वीर है।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : amar ujala
बताया गया कि शिवन्या व आयुष रोजाना सुबह स्कूल जाते थे। आयुष घर में सबसे ज्यादा शरारती था तो उसे सभी सबसे ज्यादा प्यार व दुलार करते थे। उसकी शरारतों को देखते हुए सभी उसे प्यार से आयुष बदमाश भी कहते थे।
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बच्चे की हादसे में मौत।
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वहीं जब आयुष की मौत के बारे में पता चला तो परिवार के साथ ही आसपास वालों की आंखों में आंसू छलक उठे। उसकी मां रश्मि का रो-रोकर बुरा हाल है। आंखों से निकलते आंसू और सिसकती जुबां पर सिर्फ बेटे का नाम है। आयुष पुकारते हुए बार-बार उसकी शरारतों को याद कर गुम हो जाती है।
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जांच करती पुलिस।
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रश्मि कहती है कि स्कूल जाते समय आयुष बॉय-बॉय बोलकर और हंसता चेहरा लेकर जाता था। हर समय हंसता-खेलता रहने वाला आयुष अब लौटकर नहीं आएगा।
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हंगामा करते परिजन।
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विधायक, जिलाध्यक्ष व अन्य नेता भी पहुंचे
आयुष की मौत के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष सूरजपाल गुर्जर व मनुपाल बंसल वहां पहुंचे और वहां कार्रवाई की मांग करने के साथ ही परिजनों को सांत्वना दी।