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UP: गुरुग्राम से बुलंदशहर-अलीगढ़ होकर लाए, फिर पट्टी बांधी, सात लाख में दी थी मनोज के अपहरण और हत्या की सुपारी
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 08 Apr 2026 09:41 AM IST
सार
बरेली में बंधन मुक्त कराए गए ऑटो चालक मनोज के अपहरण केस में बड़ा खुलासा हुआ है। बदमाशों को मनोज के अपहरण और हत्या की सुपारी सात लाख में दी थी। मनोज ने बताया कि गुरुग्राम से बदमाश उन्हें बिना पट्टी बांधे लेकर आए। फिर फतेहगंज पश्चिमी टोल के पास आकर उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी।
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अपहरण केस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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बरेली में बंधन मुक्त कराए गए ऑटो चालक मनोज वाल्मीकि के दिल की दहशत दो दिन बाद भी दूर नहीं हुई है। उसे अब नत्थू से खतरा सता रहा है। थाने में बैठे मनोज ने अपने और बच्चों के अपहरण की कहानी सुनाई, बताया कि बदमाश उससे कह रहे थे कि तेरी वजह से हमारे सात लाख रुपये फंसे हुए हैं।
मनोज ने चिंता जताई कि नत्थू जेल से बाहर आने के बाद उनकी हत्या करवा सकता है। सीबीगंज थाने में अमर उजाला टीम से वार्ता के दौरान मनोज ने बताया कि प्रिंस नाम का व्यक्ति उसके पास आया और बोला कि उन्हें पहाड़ी वाले मंदिर पर रोज शाम को आना जाना करना है।
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हादसे के बाद लगा जाम
- फोटो : संवाद
मनोज ने बताया कि वह नहीं भांप सके कि इस बुकिंग के पीछे भी कोई गहरी साजिश है। तीन दिन तक प्रिंस रोज उनके साथ आता जाता रहा। शनिवार के दिन उन्हें पूजा पाठ में वक्त लगा। इसके बाद प्रिंस ने लघुशंका करने के लिए कहा। तब मनोज का बेटा मयूर भी लघुशंका की बात कहने लगा।
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मनोज के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'तेरी वजह से हमारे सात लाख रुपये फंसे पड़े हैं'
उन्होंने ऑटो किनारे लगाया। इसी दौरान बराबर से काले रंग की बोलेरो आकर रुक गई। बोलेरो से उतरे लोगों ने उनके दोनों बच्चों को कब्जे में ले लिया। कहा कि अगर शोर मचाया तो तेरे दोनों बच्चों को मार देंगे। फिर उन तीनों को इन्होंने बोलेरो में बैठा लिया। मनोज ने अपनी गलती पूंछी तो इन लोगों ने गाली देकर कहा कि तेरी वजह से हमारे सात लाख रुपये फंसे पड़े हैं।
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पीड़ित मनोज
- फोटो : अमर उजाला
डीआईजी का दावा- यक्ष एप से पहचाने गए हादसे में मरे बदमाश
बरेली। सीबीगंज में बड़ा बाईपास पर हादसे में मारे गए बोलेरो सवार बदमाशों की पहचान पुलिस ने यक्ष एप के जरिये की थी। डीआईजी ने इसका खुलासा कर पुलिसकर्मियों को बदमाशों का ज्यादा से ज्यादा डिजिटल सत्यापन करने का निर्देश दिया है।
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पीड़ित मनोज और उसकी पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
तकनीकी आधारित पुलिसिंग को यक्ष एप ने नई दिशा दी है। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि हादसे में मृत बदमाश सिकंदर, मनमोहन व अन्य की पहचान नहीं हो पा रही थी। इनके साथ दो बच्चे देखकर पुलिस को आशंका हुई कि ये बदमाश हो सकते हैं। चूंकि बदमाशों के डिजिटल सत्यापन हो चुका था तो इनके चेहरे यक्ष एप पर डालने से इनकी आसानी से पहचान हो गई। इससे पहले चांदी का ब्रेसलेट निगलने वाले चोर सिकंदर की पहचान भी यक्ष एप से संभव हो सकी थी।
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