{"_id":"6a76dc9b41ff7a5de2046aaf","slug":"garbage-yard-firozabad-sanitation-workers-handle-waste-barefoot-and-bare-handed-suffer-fungal-infections-2026-08-08","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ये है 'नरक': भयानक बदबू में जहां नंगे हाथ-पैर काम कर रहे सफाईकर्मी, शरीर का हुआ ऐसा हाल; हैरान कर देंगी तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये है 'नरक': भयानक बदबू में जहां नंगे हाथ-पैर काम कर रहे सफाईकर्मी, शरीर का हुआ ऐसा हाल; हैरान कर देंगी तस्वीर
Sat, 08 Aug 2026 01:06 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:06 PM IST
सार
फिरोजाबाद के चनौरा एमआरएफ प्लांट में सफाई कर्मचारी बिना दस्ताने, मास्क और सुरक्षा जूतों के सड़ते कचरे और दलदल के बीच काम करने को मजबूर हैं। कई कर्मचारियों के पैरों में फंगल इंफेक्शन, दाद-खुजली और त्वचा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं, जबकि दो नाबालिग भी कूड़ा बीनते मिले।
विज्ञापन
खत्ताघर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद के चनौरा स्थित 250 टीपीडी (टन प्रति दिन) क्षमता वाले एमआरएफ प्लांट (खत्ताघर) में कूड़े के ढेर के बीच काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के जीवन रक्षा के नियम कबाड़ हो गए हैं। सफाई कर्मचारी बिना दस्ताने, मास्क और जूते के कचरे के ढेर के बीच नरकीय परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। आलम यह है पैरों में दाद-खुजली, रिंगवर्म और फंगल इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। मगर, नौकरी जाने के भय ने इन श्रमिकों के मुंह पर मजबूरी का ताला लगा दिया है।
पैर हुए खराब
- फोटो : अमर उजाला
समस्या उजागर कर दो, हमारा चेहरा नहीं, पेट की खातिर मजबूर हैं...
चनौरा खत्ताघर पर काम करने वाले 40 वर्षीय श्रमिक ने अपने पैरों में हुए फंगल इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि यह बिना उपकरण कार्य की देन है। वह बोले की 480 रुपये दिहाड़ी पर काम करते हैं। अगर, सुरक्षा उपकरण मांगों तो डांटा जाता है। 35 वर्षीय दूसरे श्रमिक के दोनों पैरों में इंफेक्शन हो रखा था। उसने डरते हुए बताया कि हमारी समस्या उजागर कर दो, लेकिन नाम-चेहरा नहीं। अगर, ठेकेदार को पता लगा तो नौकरी से निकाल देगा। तीसरे 42 वर्षीय श्रमिक ने हाथों की गलन, पैरों के काले व चटके हुए नाखून और पंजों से ऊपरी हिस्सों पर फैले इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि पेट की मजबूरी के आगे अब यह बौने लगते हैं। परिवार में दो बच्चे और पत्नी हैं। काम करके लौटकर घर जाते हो तो बिना नहाए बच्चों तक से नहीं मिलते हैं। डर रहता है कि कहीं, उनको भी बीमारी न जकड़ ले।
चनौरा खत्ताघर पर काम करने वाले 40 वर्षीय श्रमिक ने अपने पैरों में हुए फंगल इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि यह बिना उपकरण कार्य की देन है। वह बोले की 480 रुपये दिहाड़ी पर काम करते हैं। अगर, सुरक्षा उपकरण मांगों तो डांटा जाता है। 35 वर्षीय दूसरे श्रमिक के दोनों पैरों में इंफेक्शन हो रखा था। उसने डरते हुए बताया कि हमारी समस्या उजागर कर दो, लेकिन नाम-चेहरा नहीं। अगर, ठेकेदार को पता लगा तो नौकरी से निकाल देगा। तीसरे 42 वर्षीय श्रमिक ने हाथों की गलन, पैरों के काले व चटके हुए नाखून और पंजों से ऊपरी हिस्सों पर फैले इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि पेट की मजबूरी के आगे अब यह बौने लगते हैं। परिवार में दो बच्चे और पत्नी हैं। काम करके लौटकर घर जाते हो तो बिना नहाए बच्चों तक से नहीं मिलते हैं। डर रहता है कि कहीं, उनको भी बीमारी न जकड़ ले।
नाबालिग भी लगे हैं काम में
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नाबालिग भी लगे हैं काम में
बालश्रम पर अंकुश की लाख दुहाई देने वाले अधिकारियों पर भी चनौरा खत्ताघर की व्यवस्था सवाल खड़े कर रही है। शुक्रवार दोपहर यहां दो नाबालिग भी कूड़ा बीनने में लगे हुए थे। उनके हाथों में प्लास्टिक के बोरे थे। इनके साथ एक बालिग भी था। जैसे ही इनकी तस्वीर को कैमरे में कैद करना शुरू किया, यह तीनों काम छोड़कर जाने लगे।
बालश्रम पर अंकुश की लाख दुहाई देने वाले अधिकारियों पर भी चनौरा खत्ताघर की व्यवस्था सवाल खड़े कर रही है। शुक्रवार दोपहर यहां दो नाबालिग भी कूड़ा बीनने में लगे हुए थे। उनके हाथों में प्लास्टिक के बोरे थे। इनके साथ एक बालिग भी था। जैसे ही इनकी तस्वीर को कैमरे में कैद करना शुरू किया, यह तीनों काम छोड़कर जाने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
खत्ताघर
- फोटो : अमर उजाला
सफाई कर्मचारी संघों ने दी हड़ताल की चेतावनी
इस संबंध में जब सफाई कर्मचारी संगठनों ने बात की गई तो उन्होंने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताया। उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनय वाल्मीकि ने स्वीकार किया कि अमानवीय माहौल में काम कराए जाने से कई कर्मचारी बीमार पड़ चुके हैं। नगर निगम को पूर्व में इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। अगर, शीघ्र सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराए, तो संगठन कामबंद हड़ताल करने को मजबूर होगा। वहीं, सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री विकास चंद्र वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि निरीक्षण पर जाने वाले प्रशासनिक अधिकारी केवल खानापूर्ति कर लौट आते हैं और धरातल पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। निजी कंपनी को ठेका भी मोटी कमीशन के एवज में दिया जाता है, जिसके चलते सभी जिम्मेदार आंखों पर रिश्वत की पट्टी बांध लेते हैं।
इस संबंध में जब सफाई कर्मचारी संगठनों ने बात की गई तो उन्होंने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताया। उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनय वाल्मीकि ने स्वीकार किया कि अमानवीय माहौल में काम कराए जाने से कई कर्मचारी बीमार पड़ चुके हैं। नगर निगम को पूर्व में इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। अगर, शीघ्र सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराए, तो संगठन कामबंद हड़ताल करने को मजबूर होगा। वहीं, सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री विकास चंद्र वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि निरीक्षण पर जाने वाले प्रशासनिक अधिकारी केवल खानापूर्ति कर लौट आते हैं और धरातल पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। निजी कंपनी को ठेका भी मोटी कमीशन के एवज में दिया जाता है, जिसके चलते सभी जिम्मेदार आंखों पर रिश्वत की पट्टी बांध लेते हैं।
विज्ञापन
खत्ताघर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का है उल्लंघन
अधिवक्ता सतेंद्र सिंह बताते हैं कि एमआरएफ प्लांट व खत्ताघरों में सफाई कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने और जूते न देना उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (2016 व 2026) के नियम 15(जेडडी) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड 2020 के तहत कचरा निस्तारण में लगे कर्मचारियों को मुफ्त सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य जांच मुहैया कराना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भोपाल नगर निगम मामले में साफ किया था कि सॉलिड वेस्ट नियमों का पालन न करना महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संवैधानिक विफलता है। कंज्यूमर एजुकेशन व डॉ. बलराम सिंह केस के तहत कार्यस्थल पर बीमारी या हादसे की स्थिति में 10 लाख से 30 लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है।
अधिवक्ता सतेंद्र सिंह बताते हैं कि एमआरएफ प्लांट व खत्ताघरों में सफाई कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने और जूते न देना उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (2016 व 2026) के नियम 15(जेडडी) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड 2020 के तहत कचरा निस्तारण में लगे कर्मचारियों को मुफ्त सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य जांच मुहैया कराना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भोपाल नगर निगम मामले में साफ किया था कि सॉलिड वेस्ट नियमों का पालन न करना महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संवैधानिक विफलता है। कंज्यूमर एजुकेशन व डॉ. बलराम सिंह केस के तहत कार्यस्थल पर बीमारी या हादसे की स्थिति में 10 लाख से 30 लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है।