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झांसी अग्निकांड: जांच पर जांच... नहीं आई किसी पर आंच, अब तक न हुई एफआईआर; 12 नवजातों की मौत का जिम्मेदार कौन?

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 18 Nov 2024 01:13 PM IST
सार

Jhansi Medical College fire Case: झांसी अग्निकांड में जांच पर जांच हो रही हैं, लेकिन अभी तक किसी पर आंच नहीं आई है। अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। 12 नवजातों की जान गई लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई।

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Jhansi Medical College Fire Incident No Fir Filed 12 Babies Killed Know Full Details in Hindi
Jhansi Medical College - फोटो : अमर उजाला
झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अग्निकांड की घटना के 48 घंटे बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। इसके अलावा घटना को लेकर अस्पताल के किसी कर्मचारी की जवाबदेही भी तय नहीं की गई। जबकि घटना की एक जांच पूरी हो चुकी है। अन्य जांचें जारी हैं। मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में शुक्रवार की रात भीषण आग लग गई थी। घटना में 10 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक नवजात ने रविवार को दम तोड़ दिया। जबकि एक और नवजात ने सोमवार को दम तोड़ दिया। 12 नवजात की मौत हो चुकी है। इस घटना की मंडलायुक्त द्वारा जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जबकि, स्वास्थ्य चिकित्सा महानिदेशक की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय टीम सोमवार को यहां आकर जांच शुरू करेगी। लेकिन, इन सब के बीच अब तक घटना का मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है।
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Jhansi Medical College Fire Incident No Fir Filed 12 Babies Killed Know Full Details in Hindi
मेडिकल कॉलेज में तीमारदार और पुलिस - फोटो : अमर उजाला
अब तक जवाबदेही तय नहीं 
इसके अलावा घटना को लेकर मेडिकल के किसी कर्मचारी, अधिकारी व अन्य किसी की अब तक जवाबदेही तय नहीं की गई है। यह स्थिति तब है, जब यह मामला लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में गूंज रहा है और विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाए हुए हैं। नवजातों की मौत को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं।

 
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एक्सपायर सिलेंडर - फोटो : अमर उजाला
फायर ऑडिट में मिली थीं खामियां
मेडिकल कॉलेज में आग से बचाव के समुचित इंतजाम नहीं थे, इसकी पुष्टि फरवरी में हुई फायर ऑडिट रिपोर्ट में हुई है। इन कमियों को दूर करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने शासन को एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के बाद बताया था कि फरवरी में मेडिकल कॉलेज की फायर ऑडिट हुई और जून में मॉक ड्रिल कराया गया था। 
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मेडिकल कॉलेज के बाहर जमा भीड़ और पुलिस - फोटो : अमर उजाला
वहीं, कॉलेज के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि फरवरी में हुई ऑडिट रिपोर्ट में काफी खामियां मिली थीं जिसमें एसएनसीयू भी शामिल था। खामियों को जल्द से जल्द दूर करने के लिए भी कहा गया। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि फायर ऑडिट में मिली खामियों को दूर करने के लिए शासन को एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था। मिले 46 लाख रुपये से बिजली की खामियों को दूर कराया। जून में 126 फायर इस्टिंग्युशर रीफिल कराए हैं।
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Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
कौन है 12 नवजातों की मौत का जिम्मेदार
  • 18 बेड के एसएनसीयू वार्ड में 49 बच्चे भर्ती थे। इसकी वजह से लगातार जीवनरक्षक उपकरण चल रहे थे। ओवरलोडिंग से स्पार्किंग हुई और आग लगी। इसका जिम्मेदार कौन है।
  • नवजात बच्चों की संख्या ज्यादा थी, उनके लिए रखे ऑक्सीजन सिलिंडर भी अधिक रखे थे। इससे भी आग बढ़ी।
  • लगातार चल रहे उपकरणों को 3 से 4 घंटे बाद बंद करना था। यह प्रक्रिया भी नहीं की गई, जिससे प्लग पॉइंट गर्म हुए। इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।


 
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