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पंचायत चुनाव: यूपी की इस सीट पर पांच बार कब्जा कर चुकी है सपा, भाजपा अब तक नहीं खोल सकी खाता
Fri, 19 Mar 2021 03:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 19 Mar 2021 03:50 PM IST
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डिंपल यादव
- फोटो : social media
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उत्तर प्रदेश के कन्नौज में जिला पंचायत अध्यक्ष की अहम कुर्सी एक बार फिर पार्टियों के लिए राजनीतिक साख बन गई है। भाजपा व सपा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव 2022 का सेमी फाइनल मान रही है। ऐसे में 21 साल बाद अनारक्षित हुई यह कुर्सी सपा व भाजपा के लिए साख बन गई है।
अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook/अखिलेश भईया
सपा मुखिया अखिलेश सिंह यादव की पत्नी डिंपल का संसदीय क्षेत्र व सपा का गढ़ माने जाने वाले कन्नौज में दोनों की साख को चुनौती भाजपा के कद्दावर नेता व सांसद सुब्रत पाठक देने की तैयारी में हैं। सुब्रत पाठक के पास प्रदेश मंत्री का पद भी है। बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अभी तक भाजपा का एक बार भी खाता नहीं खुला है।
अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव
- फोटो : Facebook/The Best Cm of Up Akhilesh Yadav
सपा इस पद को पांच बार हासिल कर चुकी है। एक बार यह पद राष्ट्रीय क्रांति पार्टी व एक बार बसपा की झोली में भी जा चुकी है। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सत्ता होने और पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल मानने की वजह से भाजपा लंबे समय से अपने अनुषांगिक संगठनों के सहारे मतदाताओं में पैठ बना रही है।
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भाजपा सांसद सुब्रत पाठक
- फोटो : amar ujala
दूसरी ओर सपा मुखिया अखिलेश यादव का दौरा भी जिले की ओर बढ़ा है। सैफई जाते और लौटते समय उनका रुकना व कार्यकर्ताओं का संदेश देना इसी की एक कड़ी है। सपा ने अपनी पूरी जिला इकाई को पंचायत चुनाव पर फोकस करने का संदेश दे दिया है। साल 1998 में फर्रुखाबाद से कन्नौज के विभाजित होने पर जिला पंचायत का गठन किया गया।
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डिंपल यादव, सुब्रत पाठक
इसमें सपा से कप्तान सिंह पहले जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। बहरहाल अनारिक्षत हुई इस सीट पर राजनीतिक दिग्गजों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अब आगे देखना होगा कि इस सीट पर भाजपा को कामयाबी मिलती है या फिर सपा के खाते में इस बार भी कुर्सी जाएगी। जहां तक बसपा की बात है तो वह भी अपने सेक्टर प्रमुखों व पदाधिकारियों के माध्यम से शहर की इस कुर्सी की नब्ज समझने की जुगत कर रही है।