बिकरू कांड में तत्कालीन एसओ व हलका इंचार्ज को बर्खास्त करने के अलावा 14 अन्य पुलिसकर्मियों को दंडित किया गया है। सभी को मिस कंडक्ट दी गई है। ये सभी एसआईटी की जांच में दोषी पाए गए थे। उसी आधार पर इन पर अब विभागीय कार्रवाई हुई है। पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडित करने की कार्रवाई अभी भी जारी है। ये पूरी कार्रवाई कमिश्नरी की पुलिस ने की है।
पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने बताया कि बिकरू कांड में जो पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे उनमें से अधिकतर की जांच कमिश्नरी पुलिस को सौंपी गई थी, जिसमें से तत्कालीन एसओ विनय तिवारी व हलका इंचार्ज केके शर्मा को एडिशनल सीपी मुख्यालय ने बर्खास्त किया है।
अन्य 14 दोषी पुलिसकर्मियों को मिस कंडक्ट दी गई है, जिसमें तीन इंस्पेक्टर, सात सब इंस्पेक्टर, दो हेड कांस्टेबल व दो सिपाही शामिल हैं। तीन सब इंस्पेक्टर व दो सिपाहियों को दंडित करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। यह कार्रवाई डीसीपी मुख्यालय कर रहे हैं। जल्द ही इन पांचों पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
इन पर हुई कार्रवाई
इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव, मुकेश कुमार और बृजकिशोर मिश्रा। सब इंस्पेक्टर दीवान सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, संजय सिंह, राकेश कुमार, इंद्रपाल सरोज, सुजीत कुमार मिश्रा और रमेश चंद्र। हेड कांस्टेबल लायक सिंह और धर्मेंद्र।सिपाही विकास कुमार और कुंवरपाल सिंह पर कार्रवाई हुई है।
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फाइल फोटो
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दोषी पाए गए तीन इंस्पेक्टर हो चुके हैं सेवानिवृत्त
बिकरू कांड में इंस्पेक्टर मोहम्मद इब्राहिम, वेद प्रकाश और लालमणि सिंह भी दोषी पाए गए थे। विभागीय जांच में भी उनका दोष साबित हुआ है। इन तीनों को भी मिस कंडक्ट मिलती लेकिन यह सभी रिटायर्ड हो चुके हैं, इसलिए इन पर विभागीय कार्रवाई करना संभव नहीं है।
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विकास दुबे कांड
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14 पुलिसकर्मियों की जांच यहां के अफसर कर रहे
एडिशनल सीपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि बिकरू कांड में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों में से तीन पुलिसकर्मियों की विभागीय कार्रवाई लखनऊ पुलिस को सौंपी गई थी। जबकि चार की कानपुर आउटर पुलिस व सात की कानपुर देहात पुलिस को दी गई थी।
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विकास दुबे कांड
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बयान देने से बचते रहे दागी एसओ और दरोगा
बिकरू कांड में जेल में बंद तत्कालीन एसओ विनय तिवारी व दरोगा केके शर्मा की बर्खास्तगी को लेकर एक नया तथ्य सामने आया है। विभागीय जांच में दोनों के बयान शामिल नहीं हैं। बगैर बयानों के दोनों की बर्खास्तगी की गई है। इस वजह से भविष्य में इन पुलिसकर्मियों को लाभ मिल सकता है, हालांकि अफसरों का दावा है कि बयान के लिए जेल में कई बार नोटिस भेजे गए, लेकि न एसओ व दरोगा ने बयान देने से ही इनकार कर दिया। इसलिए बगैर बयान कार्रवाई की गई।
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विकास दुबे कांड के शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा
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चौबेपुर के तत्कालीन थानेदार विनय तिवारी व दरोगा केके शर्मा को बिकरू कांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में जेल भेजा गया था। दोनों जेल में ही बंद हैं। विभागीय जांच में दोनों को दोषी ठहराया गया है। एडिशनल सीपी मुख्यालय आनंद कुलकर्णी ने बताया कि बयान की प्रक्रिया को अपनाया गया था। कई बार जेल में नोटिस भेजकर बयान के लिए दोनों पुलिसकर्मियों से कहा गया लेकिन वह बयान दर्ज कराने को राजी नहीं हुए थे। इसलिए बगैर बयान के ही जांच पूरी की गई। दोनों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। उसी आधार पर उनको बर्खास्त किया गया है।