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'आईपीएस सुरेंद्र की कृष्ण-भक्ति और रवीना का नॉनवेज प्रेम', संदेह के घेरे में सुसाइड नोट की राइटिंग
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 10 Sep 2018 10:10 AM IST
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर एसपी सुरेंद्र कुमार की मौत के बाद रविवार को उनके बड़े भाई नरेंद्र कुमार दास ने चुप्पी तोड़ी। नरेंद्र के मुताबिक सुरेंद्र कुमार सीधा-साधा और सरल स्वभाव का था। वह शाकाहारी था और रवीना मांसाहारी। रवीना, सुरेंद्र को अपनी तरह ढालना चाहती थी। वह चाहती थी कि सुरेंद्र वही करे, जो वह चाहे। इसे लेकर रवीना अक्सर सुरेंद्र से झगड़ा करती थी। सुरेंद्र धार्मिक प्रवृत्ति का था। वह हर साल धूमधाम से जन्माष्टमी मनाता था। जन्माष्टमी के दिन सुरेंद्र ने रवीना को नॉनवेज खाने से मना कर किया था लेकिन रवीना ने उसकी बात नहीं मानी और नॉनवेज खाया था। रवीना वही करती थी, जो सुरेंद्र को नापसंद था। रवीना छोेटी-छोटी बातों पर सुरेंद्र से झगड़ा करती थी, जिससे वह तनाव में रहते थे।
सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली
- फोटो : अमर उजाला
विदाई के बाद सिर्फ एक घंटे रुकी ससुराल में
नरेंद्र ने बताया कि शादी के बाद से ही डॉ. रवीना ने सुरेंद्र को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। रवीना शादी के बाद विदाई के बाद लखनऊ स्थित ससुराल में सिर्फ एक घंटे ही रही थी। इसके बाद कार मंगा कर गोमती नगर, लखनऊ स्थित अपने पिता डॉ. रावेंद्र सिंह के घर चली गई थी। मां इंदू और परिवार के अन्य लोगों, यहां तक कि सुरेंद्र ने भी रवीना को रुकने के लिए कहा था, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी थी। उस वक्त परिजनों ने समझा कि रवीना को शायद अपने घरवालों की याद आ रही होगी, इसलिए वह अपने माता-पिता के चली गई होगी लेकिन ऐसा नहीं था। रवीना को ससुराल में रहना गवारा नहीं था। यहां तक कि सुरेंद्र को भी घर में नहीं रुकने देती थीं। सुरेंद्र छुट्टी में घर आने की बात कहते थे तो रवीना उससे झगड़ा करने लगती थी।
नरेंद्र ने बताया कि शादी के बाद से ही डॉ. रवीना ने सुरेंद्र को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। रवीना शादी के बाद विदाई के बाद लखनऊ स्थित ससुराल में सिर्फ एक घंटे ही रही थी। इसके बाद कार मंगा कर गोमती नगर, लखनऊ स्थित अपने पिता डॉ. रावेंद्र सिंह के घर चली गई थी। मां इंदू और परिवार के अन्य लोगों, यहां तक कि सुरेंद्र ने भी रवीना को रुकने के लिए कहा था, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी थी। उस वक्त परिजनों ने समझा कि रवीना को शायद अपने घरवालों की याद आ रही होगी, इसलिए वह अपने माता-पिता के चली गई होगी लेकिन ऐसा नहीं था। रवीना को ससुराल में रहना गवारा नहीं था। यहां तक कि सुरेंद्र को भी घर में नहीं रुकने देती थीं। सुरेंद्र छुट्टी में घर आने की बात कहते थे तो रवीना उससे झगड़ा करने लगती थी।
सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली
- फोटो : अमर उजाला
पत्नी चाहती थी कि पति अपने परिवार को छोड़ दे
नरेंद्र ने बताया कि रवीना चाहती थी कि सुरेंद्र अपनी मां, भाई और परिजन से अलग हो जाए। रवीना ने कभी ससुराल वालों से बातचीत नहीं की न ही हालचाल लिया। सुरेंद्र भाई-बहन या मां से फोन पर बात करता था तो रवीना उसे रोकती थी, झगड़ा करती थी। रवीना के दबाव में ही तीन महीने से सुरेंद्र ने अपनी मां से बात नहीं की थी। पहले वह हर 10-15 दिन में मां और परिवार के अन्य लोगों से फोन पर बातचीत करते थे। रवीना के माता-पिता ने भी कभी सुरेंद्र के घरवालों से बातचीत नहीं की। बकौल नरेंद्र, भाई की शादी को डेढ़ वर्ष हो गए, लेकिन कभी रवीना से उनकी बात तक नहीं हुई और न ही उनके घरवालों से।
नरेंद्र ने बताया कि रवीना चाहती थी कि सुरेंद्र अपनी मां, भाई और परिजन से अलग हो जाए। रवीना ने कभी ससुराल वालों से बातचीत नहीं की न ही हालचाल लिया। सुरेंद्र भाई-बहन या मां से फोन पर बात करता था तो रवीना उसे रोकती थी, झगड़ा करती थी। रवीना के दबाव में ही तीन महीने से सुरेंद्र ने अपनी मां से बात नहीं की थी। पहले वह हर 10-15 दिन में मां और परिवार के अन्य लोगों से फोन पर बातचीत करते थे। रवीना के माता-पिता ने भी कभी सुरेंद्र के घरवालों से बातचीत नहीं की। बकौल नरेंद्र, भाई की शादी को डेढ़ वर्ष हो गए, लेकिन कभी रवीना से उनकी बात तक नहीं हुई और न ही उनके घरवालों से।
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली
- फोटो : अमर उजाला
हमने कभी सुरेंद्र से पैसा नहीं मांगा
नरेंद्र ने रवीना के घर वालों का यह आरोप झूठा बताया है कि सुरेंद्र के घर वाले उससे रुपये मांगते थे। नरेंद्र के मुताबिक उनकी मां इंदू को 33 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। वह भी कांस्ट्रेशन का काम करते हैं। लोहे की दुकान भी है। वह लोग खुद सक्षम हैं। उन लोगों ने कभी सुरेंद्र कुमार से पैसा नहीं मांगा। नरेंद्र ने सुरेंद्र की पत्नी डॉ. रवीना सिंह पर गुस्सा निकाला। कहा, मेरे भाई की मौत के लिए उसकी पत्नी डॉ. रवीना जिम्मेदार है। रवीना, सुरेंद्र को परिवार से अलग करना चाहती थी। सुरेंद्र बहुत भावुक, संवेदनशील और परिवार को साथ लेकर चलने वाला था।
नरेंद्र ने रवीना के घर वालों का यह आरोप झूठा बताया है कि सुरेंद्र के घर वाले उससे रुपये मांगते थे। नरेंद्र के मुताबिक उनकी मां इंदू को 33 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। वह भी कांस्ट्रेशन का काम करते हैं। लोहे की दुकान भी है। वह लोग खुद सक्षम हैं। उन लोगों ने कभी सुरेंद्र कुमार से पैसा नहीं मांगा। नरेंद्र ने सुरेंद्र की पत्नी डॉ. रवीना सिंह पर गुस्सा निकाला। कहा, मेरे भाई की मौत के लिए उसकी पत्नी डॉ. रवीना जिम्मेदार है। रवीना, सुरेंद्र को परिवार से अलग करना चाहती थी। सुरेंद्र बहुत भावुक, संवेदनशील और परिवार को साथ लेकर चलने वाला था।
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली
- फोटो : अमर उजाला
बहू ने सुरेंद्र को इतना प्रताड़ित किया कि उसे जान देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं सूझा। वह पत्नी के व्यवहार से पूरी तरह टूट गया था तभी बिना कुछ सोचे समझे अपनी जान दे दी। नरेंद्र ने कहा कि सोमवार को सुरेंद्र के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस को तहरीर देंगे। साथ ही सुसाइड नोट की भी जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट की राइटिंग सुरेंद्र की लग रही है, लेकिन राइटिंग एक्सपर्ट से भी पत्र लिखवाया जा सकता है। इसलिए सुसाइड नोट की जांच कराना जरूरी है।