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औरेया हादसा: रोटी खा गई 26 जिंदगी, पहले घर और अब दुनिया से किया दूर, बेबस मजदूरों ने बयां किया दर्द
अमर उजाला नेटवर्क, औरेया
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 17 May 2020 09:49 AM IST
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
जी हां, ये रोटी ही थी जिसका 26 मजदूर निवाला बन गए। ये रोटी ही थी जो उन्हें दूर-देश ले गई और फिर उन्हें दुनिया से ही बहुत दूर कर दिया। रोजी रोटी की चिंता से मुक्त। ये रोटी ही थी। जो उन्हें घर वापस ला रही थी और ये रोटी ही थी, जिसे समेटकर वो सफर पर निकले थे। यही रोटी इनके इर्द-गिर्द बिखरी थी जब वे अपने आखिरी सफर पर निकल गए।
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
औरैया में शनिवार भोर में हुए हादसे के बाद चूने के बोरे में दबे मजदूरों की छटपटाहट व्यवस्था की लाचारियां बयां कर रही थी। मौके से लेकर अस्पताल तक चीखें और सिसिकियां ही गूंज रही थीं। ट्राला पलटने से चूने की बोरियों के तले दबे मजदूरों की चींखें तक कोई न सुन सका।
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
धमाके से नींद खुली...हम दबे थे फिर बेहोश हो गए
झारखंड के धनंजय ने बताया कि हम ट्रक पर सो रहे थे, तेज धमाका हुआ। आंखें खुली तो खुद को बोरियों के नीचे दबा पाया। दम घुट रहा था। सांस नहीं आ रही थी। फिर बेहोश हो गया। होश आया तो अस्पताल में थे।
झारखंड के धनंजय ने बताया कि हम ट्रक पर सो रहे थे, तेज धमाका हुआ। आंखें खुली तो खुद को बोरियों के नीचे दबा पाया। दम घुट रहा था। सांस नहीं आ रही थी। फिर बेहोश हो गया। होश आया तो अस्पताल में थे।
यूपी के औरैया में बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
भूख से दम निकलने की नौबत थी
शिवराम कर्मकार निवासी वोंगावड़ी पुरुलिया पश्चिम बंगाल ने कहा कि कोरोना से इतना डर नहीं लग रहा था। डर था कि भूख से दम न निकल जाए। यह सोचकर अपने घर को लौट रहे थे। वह जयपुर से पटना बिहार जाने के लिए ट्रॉला में सवार हुआ था।
शिवराम कर्मकार निवासी वोंगावड़ी पुरुलिया पश्चिम बंगाल ने कहा कि कोरोना से इतना डर नहीं लग रहा था। डर था कि भूख से दम न निकल जाए। यह सोचकर अपने घर को लौट रहे थे। वह जयपुर से पटना बिहार जाने के लिए ट्रॉला में सवार हुआ था।
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यूपी के औरैया में बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
काम छिना, पैसा हुआ खत्म
अंकुर निवासी फडमुडेरा कप्तान गंज जिला कुशीनगर ने बताया कि फैक्ट्री में काम बंद हो गया था। बैठे-बैठे कब तक खाते? पैसा बचा नहीं था और खर्चे कम नहीं हो रहे थे। काम शुरू होने की कोई आस नहीं दिख रही थी। इसलिए घर के लिए निकल पड़े थे।
अंकुर निवासी फडमुडेरा कप्तान गंज जिला कुशीनगर ने बताया कि फैक्ट्री में काम बंद हो गया था। बैठे-बैठे कब तक खाते? पैसा बचा नहीं था और खर्चे कम नहीं हो रहे थे। काम शुरू होने की कोई आस नहीं दिख रही थी। इसलिए घर के लिए निकल पड़े थे।