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"बैंडिट क्वीन" की दुर्लभ तस्वीरें, जिसने तय किया चंबल के बीहड़ से संसद तक का सफर

Thu, 26 Jul 2018 09:55 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 26 Jul 2018 09:55 AM IST
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death anniversary of Phoolan Devi Rare pictures of Bandit Queen
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
चंबल के बिहड़ों से देश की संसद तक का सफर तय करने वाली महिला जो कभी खूंखार डकैतों में शुमार होती थी आज उनकी पुण्यतिथि है। एक ऐसा नाम जिसकी मर्जी के बिना बीहड़ का पत्ता भी नहीं हिलता था लेकिन समय ने कुछ ऐसी करवट ली कि 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी देश की संसद तक पहुंचीं। जानिए फूलन देवी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें साथ ही देखिए 'बैंडिट क्वीन' की दुर्लभ तस्वीरें...
death anniversary of Phoolan Devi Rare pictures of Bandit Queen
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी के नाम की इतनी दहशत थी कि बड़े-बड़े लोगों की रूह कांपने लगती थी। कहा जाता था कि वह बहुत कठोर दिल वाली थी। हालांकि इसके पीछे बहुत बड़ा कारण था। जानकारों की मानें तो फूलन को हालात ने इतना कठोर बना दिया कि उन्होंने बहमई में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया। फूलन ने एक साथ लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी और उन्हें इसका जरा भी अफसोस नहीं हुआ। इस औरत ने अपनी छोटी सी जिंदगी में तमाम दुख झेले। यही वजह थी यूपी (जालौन) के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली ये औरत केवल भारत ही नहीं विदेश में भी चर्चित हो गई।
death anniversary of Phoolan Devi Rare pictures of Bandit Queen
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
जुर्म की दुनिया छाेड़कर राजनीति में आई फूलन को लाेगाें ने संसद तक पहुंचाया।चंबल के बीहड़ों से संसद पहुंचने वाली फूलन देवी पर ब्रिटेन में आउटलॉ नाम की एक किताब प्रकाशित हुई है जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। फूलन देवी को मिली जेल की सजा के बारे में पढ़ने के लिए लेखक रॉय मॉक्सहैम ने 1992 में उनसे पत्राचार शुरू किया। जब फूलन देवी ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया तो रॉय मॉक्सहैम भारत आए और उन्हें फूलन देवी को करीब से जानने का मौका मिला।  
 
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death anniversary of Phoolan Devi Rare pictures of Bandit Queen
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन के पास बने एक गांव पूरवा में 10 अगस्त 1963 में हुआ था। इसी गांव से उसकी कहानी भी शुरू होती है। जहां वह अपने मां-बाप और बहनों के साथ रहती थी। कानपुर के पास स्थित इस गांव में फूलन के परिवार को मल्लाह होने के चलते ऊंची जातियों के लोग हेय दृष्टि से देखते थे। इनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता था।
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बैंडिट क्वीन फूलन देवी
फूलन के पिता की सारी जमीन उनके सगे भाई ने झगड़ा करके जबरन बैनामा कराकर छीन ली थी। फूलन के पिता जो कुछ भी कमाते वो जमीन के झगड़े के चलते वकीलों की फीस में चला जाता। फूलन इसी तरह के दमघोंटू माहौल में पलती और बड़ी होती रही। उसके अंदर बदले की आग से जलने लगी। आग की इस जलन को सुलगाने में उसकी मां ने भी आग में घी का काम किया।
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