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फर्रुखाबाद बवाल: पुलिस भांप न सकी गुस्सा, हो गया हमला, कारों में तोड़फोड़; पथराव और लाठीचार्ज की इनसाइड स्टोरी
अमर उजाला नेटवर्क, फर्रुखाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 10 May 2026 09:36 AM IST
सार
फर्रुखाबाद के राजेपुर थाना इलाके के गांव चाचूपुर जटपुरा में युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जबरन ले जाने पर शनिवार को जमकर बवाल हुआ। गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर एसओ की गाड़ी गड्ढे में पलट दी। पुलिस वाहन और लेखपाल के वाहनों के शीशे तोड़ दिए। पथराव में राजेपुर एसओ सहित चार पुलिस कर्मी, आबकारी निरीक्षक और चार ग्रामीण घायल हैं। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात है। पुलिस ने दो महिलाओं समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया है।
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farrukhabad violence
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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फर्रुखाबाद के राजेपुर थाना इलाके के गांव चाचूपुर जटपुरा में पथराव होने के कुछ ही देर बाद चाचूपुर छावनी में तब्दील हो गया। हर गली में पुलिस के बूटों की आवाज सुनाई दे रही थी। कोई बच्चा भी गली में घूमता नहीं दिखा। सभी घरों में दुबक गए थे या खेतों की ओर भाग गए थे।
पथराव के कुछ देर बाद ही पांच थानों व पुलिस लाइन से फोर्स चाचूपुर पहुंच गया। इसके बाद पुलिस एक्शन में नजर आई। लाठियां फटकार कर ग्रामीणों को खदेड़ दिया। लोग घरों में घुस गए। सड़क पर सन्नाटा होने के बाद पुलिस ने उपद्रव करने वालों को चिह्नित कर उन्हें घर से पकड़ लिया।
इसके अलावा उधर से गुजरने वाले लोगों को रोकर उनकी तस्दीक करने के बाद ही आगे जाने दिया गया। बाइक से निकलने वाले गांवों के लोगों को रोकर पूछताछ की और हाथों मिट्टी लगे होने या कपड़ों में मिट्टी लगी होने पर उन्हें पकड़ लिया और थाने भेज दिया।
गांव में आए दिन होता विवाद, पहले भी हो चुकी ठेका बंद कराने की मांग
चाचूपुर गांव में देसी शराब का ठेका करीब बीस वर्ष से है। जबकि पिछले दो वर्ष से अंग्रेजी शराब का भी ठेका खुल गया है। गांव की महिलाओं का कहना है कि शराब का ठेका होने से उनके घरों के पुरुष शराब पीने के आदी हो गए हैं।
इसके चलते गांव में आए दिन विवाद होता है। मजदूरी करने के बाद शराब पीने से आर्थिक स्थिति भी नहीं सुधर पा रही है। ब्रजेश भी मजदूरी करता था और शराब पीने का आदी था। ग्रामीणों का आरोप है उसका शुक्रवार को शराब ठेके के सेल्समैन से विवाद हुआ था। इसके बाद वह जाकर पुलिया पर बैठ गया था। देर शाम गांव के लोगों ने उसे देखा था। पर बाद में नजर नहीं आया था।
इसके चलते ही उसके परिजन हत्या कर शव फेंके जाने का आरोप लगा रहे थे। तभी उन्होंने शव उठाकर शराब ठेके के बाहर ले जाकर रख दिया था। इस शराब के ठेके को बंद कराने के लिए करीब दो वर्ष पूर्व भी महिलाओं ने जाम लगाया था। तब उन्हें ठेका हटाए जाने का भरोसा देकर शांत कर दिया गया था।
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