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अंधविश्वास: एक दिन जरूर उठेगा विमलेश, मां ने बर्थडे पर लगाया टीका...रोज पूजा कर मांगती थी लंबी उम्र की दुआ
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 25 Sep 2022 08:55 AM IST
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income tax officer dead body
- फोटो : अमर उजाला
अप्रैल 2021 में ही दम तोड़ चुके रोशननगर निवासी आयकर अधिकारी विमलेश कुमार (35) के जीवित होने के अंध विश्वास में पूरा परिवार मानो मनोरोगी सा हो गया है। माता-पिता से लेकर घर के बच्चे तक विमलेश की आंखें खुलने के इंतजार में शव की डेढ़ साल तक सेवा करते रहे। इस दौरान न तो परिवार ने कोई त्योहार मनाया और न ही घर में अच्छा खाना बना। विमलेश के बड़े भाई सुनील का कहना था कि भाई की धड़कन चल रही थी। कोरोना के चलते कोई डॉक्टर उसे भर्ती नहीं कर रहे थे। इस वजह से डॉक्टरों से सलाह लेकर घर में ही इलाज कर रहे थे। वहीं शुक्रवार शाम को विमलेश के अंतिम संस्कार के बाद से मां राम दुलारी और पत्नी मिताली के आंसू नहीं रुक रहे हैं। मिताली ने तो खुद को एक कमरे में बंद कर लिया है। पूरे परिवार को गम में डूबा देख पिता भी आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
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income tax officer dead body
- फोटो : अमर उजाला
विमलेश की मौत से सदमे में पूरा परिवार
मूलरूप से बिल्हौर के उत्तरी चैतपुर निवासी विमलेश के परिवार में पिता रामऔतार, मां रामदुलारी, पत्नी मिताली, बेटा संभव एलकेजी का छात्र (04) बेटी दृष्टि (18 माह), बड़ा भाई सुनील, उनकी पत्नी माया, सुनील के तीन बच्चे हिमांशी, कृति, व बेटा पार्थ है।
मूलरूप से बिल्हौर के उत्तरी चैतपुर निवासी विमलेश के परिवार में पिता रामऔतार, मां रामदुलारी, पत्नी मिताली, बेटा संभव एलकेजी का छात्र (04) बेटी दृष्टि (18 माह), बड़ा भाई सुनील, उनकी पत्नी माया, सुनील के तीन बच्चे हिमांशी, कृति, व बेटा पार्थ है।
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income tax officer dead body
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा मझला भाई दिनेश, उसकी पत्नी अर्चना व उनका एक बेटा ट्रंप भी इसी घर में रहता है। बड़े भाई ने बताया कि विमलेश और उनका परिवार मकान के प्रथम तल पर रहता है। दिनेश और माता पिता ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।
मृतक की मां और बाप
- फोटो : अमर उजाला
एक दिन जरूर ठीक होगा मेरा विमलेश
पिता रामऔतार ने बताया कि पूरे परिवार को विश्वास था कि विमलेश जिंदा है, कोमा में चला गया है। एक दिन वह ठीक होकर उठ खड़ा होगा। प्रतिदिन उसकी मां राम दुलारी उसके सिरहाने बैठकर निहारती, साफ सफाई करती। गंगाजल मुंह में डालती थी। राम दुलारी ने बताया कि उसका बेटा भले कुछ खा-पी नहीं रहा था, लेकिन उसकी धड़कनें चल रहीं थीं। परिवार वाले यही बात मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों को भी बताते थे। छोटे बच्चे भी विमलेश के शव तक जाते थे, उसे छूते थे।
पिता रामऔतार ने बताया कि पूरे परिवार को विश्वास था कि विमलेश जिंदा है, कोमा में चला गया है। एक दिन वह ठीक होकर उठ खड़ा होगा। प्रतिदिन उसकी मां राम दुलारी उसके सिरहाने बैठकर निहारती, साफ सफाई करती। गंगाजल मुंह में डालती थी। राम दुलारी ने बताया कि उसका बेटा भले कुछ खा-पी नहीं रहा था, लेकिन उसकी धड़कनें चल रहीं थीं। परिवार वाले यही बात मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों को भी बताते थे। छोटे बच्चे भी विमलेश के शव तक जाते थे, उसे छूते थे।
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मृतक का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
रोज पूजा कर मांगती थी लंबी उम्र की दुआ
मां रामदुलारी ने बताया कि पूरा परिवार प्रतिदिन पूजा कर विमलेश के जल्दी ठीक होने और लंबी उम्र की प्रार्थना करता था। दोनों भाई जब अपने काम से लौटते थे तो मां से आकर विमलेश से उसका हालचाल पूछते थे।
मां रामदुलारी ने बताया कि पूरा परिवार प्रतिदिन पूजा कर विमलेश के जल्दी ठीक होने और लंबी उम्र की प्रार्थना करता था। दोनों भाई जब अपने काम से लौटते थे तो मां से आकर विमलेश से उसका हालचाल पूछते थे।