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यूपी की इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा के दिग्गजों को मिल चुकी है हार, सपा का ये बड़ा नाम भी हुआ शामिल
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 27 May 2019 11:24 AM IST
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डिंपल यादव
- फोटो : ट्विटर
राजनीति के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट पर भाजपा ने लंबे समय के बाद वापसी की है। इस लोकसभा सीट की सबसे खास बात है कि यहां कांग्रेस से लेकर भाजपा के दिग्गज नेताओं को भी हार का स्वाद चखना पड़ा। लंबे अर्से से यह सीट समाजवादी पार्टी के पास थी लेकिन इस बार फिर से भाजपा ने इस सीट पर कब्जा किया है।
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शीला दीक्षित
- फोटो : अमर उजाला
कन्नौज लोकसभा सीट पर एक और दिग्गज प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। इन दिग्गजों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित, भाजपा के फायर ब्रांड नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी और वर्तमान में यूपी सरकार में राज्यमंत्री अर्चना पांडेय के पिता रामप्रकाश त्रिपाठी के बाद अब डिंपल यादव का नाम जुड़ गया है।
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मुलायम सिंह यादव, ब्रम्हदत्त द्विवेदी, मायावती (फाइल फोटो)
1984 का लोकसभा चुनाव आज भी कन्नौज की राजनीति में खासा महत्व रखता है। दरअसल, इस चुनाव में शीला दीक्षित ने पहली बार जीत दर्ज की थी। बाद में वह दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। इसी चुनाव में भाजपा के फायर ब्रांड नेता रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
संसदीय क्षेत्र में रोड शो के दौरान डिंपल यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
उन्हें निर्दलीय से कम वोट मिले थे। वह चौथे नंबर पर रहे थे। तीसरे नंबर पर रहे निर्दल प्रत्याशी सूबेदार सिंह को 70244 (14.58 फीसदी) मत मिले। ब्रह्मदत्त द्विवेदी को 38916 (8.08 फीसदी) मत मिले थे। तब कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। शीला दीक्षित ने प्रतिद्वंदी छोटे सिंह यादव को 61815 वोटों से मात दी थी। इस बार डिंपल यादव के हाथों से ये सीट चली गई।
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प्रभारी मंत्री अर्चना पांडेय। (फाइल फोटो)
इसके बाद 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित को छोटे सिंह यादव से हार का सामना करना पड़ा था। छोटे सिंह ने हार का बदला लेते हुए शीला दीक्षित को 53833 मतों से परास्त किया था। इससे पहले 1980 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान में राज्यमंत्री अर्चना पांडेय के पिता रामप्रकाश त्रिपाठी को भी इस सीट से हार का सामना करना पड़ा था।