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कहानी शिवपाल के शंभू की, भतीजों का तिलिस्म चकनाचूर करने में नहीं छोड़ी कोई कसर, कुछ यूं बिछाई बिसात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 27 May 2019 09:16 AM IST
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shivpal yadav akhilesh yadav and akshay yadav story in lok sabha election 2019
अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, अक्षय यादव
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा प्रदेश अध्यक्ष के तिलिस्म को तोड़ने में जाने अनजाने उनके चाचा ने ही अहम भूमिका निभाई। इसका परिणाम यह रहा कि प्रदेश की कई अन्य सीटों पर भी सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इटावा सीट पर लगातार दूसरी बार भाजपा की जीत हुई तो वहीं कन्नौज सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी को शिकस्त दी।
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शिवपाल सिंह यादव - फोटो : @shivpalsinghyadav
औरैया जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें औरैया और दिबियापुर इटावा संसदीय सीट के अंतर्गत तो बिधूना कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में आती है। दोनों ही सपा के गढ़ कहे जाते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी लहर में ऐतिहासिक जीत कराई थी लेकिन कन्नौज सीट से तब भी सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने जीत हासिल कर ली थी।
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शिकोहाबाद पहुंचे शिवपाल सिंह यादव पत्रकारों से बातचीत के दौरान - फोटो : अमर उजाला
2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन बनाकर सपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश में नया इतिहास लिखने का तिलिस्म बनाया। इस तिलिस्म को तोड़ने में सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने अहम भूमिका निभाई। भले ही चाचा ने प्रदेश के सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे लेकिन जिन सीटों पर उतारे वहां सपा के वोट काटे और सपा नेताओं को भी सपा को हराने में उनकी मदद लेते हुए पीछे से भाजपा का साथ देने का काम किया। 
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मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव, अखिलेश यादव व डिंपल यादव
इटावा सीट पर चाचा शिवपाल सिंह की प्रगतिशील पार्टी से शंभू दयाल दोहरे मैदान में थे। चुनाव के शुरुआती समय में लगा कि प्रत्याशी की जीत के लिए कार्यकर्ता दिन रात एक किए हैं लेकिन सूत्रों के अनुसार, 2019 के लोकसभा मतदान से 24 घंटे पहले पार्टी के कार्यकर्ता भाजपा के पक्ष में हवा बनाने में जुट गए। फिरोजाबाद में शिवपाल को हार का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने अक्षय के वोटबैंक में भी सेंधमारी की। इसी का परिणाम रहा कि अक्षय को हार का सामना करना पड़ा।
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शिवपाल यादव-डिंपल यादव (फाइल फोटो)
यहां तक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी भाजपा के पक्ष में डालते हुए भाजपा को मजबूत बनाने का जिक्र करते हुए भाजपा को मजबूत बनाया। परिणाम यह रहा कि प्रसपा का वोटबैंक भाजपा में जा पहुंचा।
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