{"_id":"5ce6719ebdec22070c090f83","slug":"lok-sabha-chunav-2019-result-dimple-yadav-and-subrat-pathak-kannauj-and-etawah-lok-sabha-results","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"भरभरा कर गिरे सपा के किले, मुलायम का जलवा और अखिलेश-माया की जोड़ी भी न कर पाई कमाल, सबसे बड़ा झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भरभरा कर गिरे सपा के किले, मुलायम का जलवा और अखिलेश-माया की जोड़ी भी न कर पाई कमाल, सबसे बड़ा झटका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज/इटावा
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 24 May 2019 05:06 AM IST
विज्ञापन
1 of 5
डिंपल यादव, अखिलेश यादव, मायावती
- फोटो : ट्विटर
Link Copied
कन्नौज लोकसभा सीट से डिंपल की हार ने राजनीति के कई धुरंधरों की सियासी गणित पर प्रश्न चिन्ह जरूर लगा दिये हैं। कन्नौज सीट पर अखिलेश और मायावती की जोड़ी ने जमकर चुनाव प्रचार किया। इतना ही नहीं जनता तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किया। इटावा से भाजपा प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया ने जीत दर्ज की तो कन्नौज में भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को शिकस्त दी। इसके साथ भाजपा ने इन दोनों गढ़ों को ध्वस्त कर दिया।
Trending Videos
2 of 5
डिंपल यादव, अखिलेश यादव, मायावती
- फोटो : गूगल
मोदी के‘राष्ट्रवाद’ ने सपाई किले को ढहा दिया। ‘राष्ट्रवाद’ के आगे सारे मुद्दे धरे रह गए। लोगों ने भाजपा को खुलकर वोट किया। सुब्रत पाठक की जीत ने साबित कर दिया कि पीएम मोदी ‘राष्ट्रवाद’के मुद्दे को देश के सामने रखने में और उसके दम पर भाजपा के पक्ष में लहर बनाने में कामयाब रहे। एयर स्ट्राइक के मुद्दे पर भी मोदी को भारी जन समर्थन मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 5
सुब्रत पाठक, डिंपल यादव और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मायावती ने कन्नौज में डिंपल के समर्थन में चुनावी सभा की। इस दौरान डिंपल ने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया था। मायावती ने डिंपल को अपने परिवार की सदस्य भी बताया था। इन तमाम बातों के बावजूद जनता के दिलों तक वो बातें नहीं पहुंच पाईं जो सपा-बसपा गठबंधन पहुंचना चाहता था। इस सीट को मुलायम परिवार के गढ़ के रूप में देखा जाता रहा है। इसी सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर डिंपल संसद तक पहुंची थीं।
4 of 5
डिंपल यादव, सुब्रत पाठक
2014 की मोदी लहर भी डिंपल की जीत को रोक पाने में असफल रही थी। लेकिन 2019 में सियासी गणित इस कदर बिगड़े कि डिंपल को अपने गढ़ में हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
5 of 5
डिंपल यादव, सुब्रत पाठक
इस चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन होने के बावजूद डिंपल का हारना कई सवाल खड़ा कर गया। सियासी पंडितों के अनुसार दोनों पार्टियां अपने-अपने वोट बैंक को एक-दूसरे के खाते में ट्रांसफर करने में नाकामयाब रहे।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।