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आज ही के दिन 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी की हुई थी हत्या, जानिए क्या थी वजह

Wed, 25 Jul 2018 03:51 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 25 Jul 2018 03:51 PM IST
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Phoolan devi punyatithi special story
फूलन देवी
अस्सी के दशक में चंबल के बिहड़ों में 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी के नाम की इतनी दहशत थी कि बड़े-बड़े लोगों की रूह कांपने लगती थी। कहा जाता था कि वह बहुत कठोर दिल वाली थी। हालांकि इसके पीछे बहुत बड़ा कारण था। जानकारों की मानें तो फूलन को हालात ने इतना कठोर बना दिया कि उन्होंने बहमई में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया। फूलन ने एक साथ लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी और उन्हें इसका जरा भी अफसोस नहीं हुआ। चंबल के बीहड़ों से संसद पहुँचने वाली फूलन देवी पर ब्रिटेन में आउटलॉ नाम की एक किताब प्रकाशित हुई है जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। फूलन देवी को मिली जेल की सजा के बारे में पढ़ने के लेखक रॉय मॉक्सहैम ने 1992 में उनसे पत्राचार शुरू किया। जब फूलन देवी ने उनके पत्र का जवाब दिया तो रॉय मॉक्सहैम भारत आए और उन्हें फूलन देवी को करीब से जानने का मौका मिला।  


आगे की स्लाइड में पढ़ेः- जानिए कौन थी फूलन देवी...

 
Phoolan devi punyatithi special story
फूलन देवी
फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन के पास बने एक गांव पूरवा में 10 अगस्त 1963 में हुआ था। इसी गांव से उसकी कहानी भी शुरू होती है। जहां वह अपने मां-बाप और बहनों के साथ रहती थी। कानपुर के पास स्थित इस गांव में फूलन के परिवार को मल्लाह होने के चलते ऊंची जातियों के लोग हेय दृष्टि से देखते थे। इनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता था। फूलन के पिता की सारी जमीन उनके सगे भाई ने झगड़ा करके जबरन बैनामा कराकर छीन ली थी। फूलन के पिता जो कुछ भी कमाते वो जमीन के झगड़े के चलते वकीलों की फीस में चला जाता। 25 जुलाई 2001  में महज 38 साल की उम्र में दिल्ली में घर के सामने ही फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी। खुद को राजपूत गौरव के लिए लड़ने वाला योद्धा बताने वाले शेर सिंह राणा ने फूलन की हत्या के बाद दावा किया था 1981 में मारे गए सवर्णों की हत्या का बदला लिया है। 

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- बूढ़े आदमी से करवा दी गई शादी...
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फूलन देवी
फूलन दमघोंटू माहौल में पलती और बड़ी होती रही। उसके अंदर बदले की आग से जलने लगी। आग की इस जलन को सुलगाने में उसकी मां ने भी आग में घी का काम किया। जब फूलन 11 साल की हुई, तो उसके चचेरे भाई मायादिन ने उसको गांव से बाहर निकालने के लिए उसकी शादी पुत्ती लाल नाम के बूढ़े आदमी से करवा दी गई।फूलन के पति ने शादी के तुरंत बाद ही उसका रेप किया और उसे प्रताड़ित करने लगा। परेशान होकर फूलन पति का घर छोड़कर वापस मां-बाप के पास जाकर रहने लगी।

आगे की स्लाइड मे पढ़ेंः- फूलन को हमेशा जान जाने का खतरा महसूस होता था...
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फूलन देवी
कहा जाता था कि फूलन देवी का निशाना बड़ा अचूक था और उससे भी ज्यादा कठोर था उनका दिल। उनके जीवन पर कई फिल्में भी बनीं लेकिन पुलिस का डर उन्हें हमेशा बना रहता था। साथ ही खासकर ठाकुरों से उनकी दुश्मनी थी इसलिए उन्हें अपनी जान का खतरा हमेशा महसूस होता था। चंबल के बीहड़ों में पुलिस और ठाकुरों से बचते-बचते शायद वह थक गईं थी इसलिए उन्होंने हथियार डालने का मन बना लिया।
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