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रावण के मरे से पहिलेहे काहे जलावत हौ: राजू श्रीवास्तव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:03 PM IST
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राजू श्रीवास्तव
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दोस्तों पिछले दिनों दशहरा के टाइम हम कानपूर आय रहेन अउर जइसा कि हम पिछली दफा बताये रहेन कि हम गए रहेन बर्रा आपन मामा के हिंया.. तो हुंवा हम आपन मामी से बतियावत रहेन.. तो हमरी मामी कहे लागीं बच्चा अब हमरी उमर हुई गे.. का जानि कब प्रभु जी बुलाय लें.. बस बच्चा सब ठीक ठाक निपटत रहे अउर का चाहि.. हम कहा अउर सुनाओ मामी.. तो कहे लागीं ए बच्चा ई रामलीला मंडली वाले जान आजिज किये हैं..
राजू श्रीवास्तव
अब बताओ ई लोग हनुमान पार्क वाले चंद्रप्रकास के लरिका ओमप्रकास का फिर सीता बनाय दिहिन.. अरे सीता बनाय का है तो कौनो केर बिटिया का बनाय देते.. कोऊ सीता ना बनत रहा तो ओमप्रकास का बनाय दिहिन.. याक दाएँ ई ओमप्रकासवा मंदोदरी बना रहा.. नहीं तो हर साल सीता बनत हे.. ई सब एके घर मा केहू का पता नाहीं रहा.. तो अबकी जौने दिन सीता हरण रहा तो चंद्रप्रकास एके बाप गए रामलीला देखे.. ओका देख के कहे लाग कि ई सीता तो आपन ओमप्रकास लग रहा है.. तो उनका कोऊ बताईस कि ई तोहार लरिका ओमप्रकासै होय जौने सीता बने भये हैं..
Raju Srivastav
अउर ई आज नाही बने हैं हर साल बनत हैं.. बाद मा ऊ घर आवा.. तो चंद्रप्रकास डंडा लई के जो उस से पूछिन हैं.. अये बच्चा हमसे ना पूछौ.. कहिन कि हम तुमका मेहेरिया बने खातिर पैदा किया रहा का.. औरत बने भये हौ.. बहुत खरी खोटी सुनाईन.. तब से उनका लौंडा घर से बाहर नाहीं निकरा.. सही बात आय बच्चा सीता बनौ कौनो बुरी बात नाही.. पर कबहूँ कुछ औरौ बनौ.. कभों लक्ष्मण बनौ, कभों हनुमान बनौ.. हम कहा मामी अबकी रामलीला कइसी भई रही.. तो बतावे लागीं एक दिना रामलीला होत रही अउर बिजली चली गयी.. जनरेटर चालु होय का नाम ना लै.. जानौ कचड़ा फंसी गवा रहै इंजन मा.. जब तक गैस बत्ती जलावें जलावें तब तक चोरी हुई गे..
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Raju Srivastav
रावण के तीन मुकुट गायब.. लक्ष्मण का धनुष अउर हनुमान जी कि गदा गायब हुई गयी.. वहीं ई नयापुरवा के कुंजीलाल का लरिका पकरा गा.. सब टारच मार के देखिन तो हनुमान जी केर गदा अउर रावण केर मुकुट गोदी पकडे रहा.. सब कहिन चोरी करत हौ.. तो कहे लाग कि चोरी नाही करत रहेन.. हम तो ई सब पकडे बइठे हन ताकि कौनो ई सब चुरा ना लेवे.. अईस बचि गवा नाही तो उई दिना ओकी खोपड़ी पे चौराहा बनाय के कुटाई होत.. अउर सुनौ.. रावण के जले से दुई दिना पहिले ई हनुमान पार्क वाले शिवबोधन का लरिका माचिस लीन्हे रावण के पुतला कि तरफ भागत रहा,, ए बच्चा ऊ एक दिन पहिले ही रावण का फूंके वाला रहा.. ऊ तो कहौ सब पंचे ओका पकर लिहिन..
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राजू श्रीवास्तव
अगर ई पकरी ना लीन्ह जाय तो ई रावण के मरे से पहिलेहे जला देत.. देखो बच्चा हमका परपंचई कि आदत नहीं है.. कहे वाली बात तो आय मगर तुम केहू से कहेव नाही.. हमका का करे का है.. अउर बच्चा एक दिन हम आटे का हलवा बनावा.. हम कहा चलो रामजी सीताजी का खवा आई.. तो हम हलवा पीछे पिंडाल मा भिजवाय दिहा.. बाद मा हम पिंडाल के पीछे गएन तो का देखत हन बच्चा.. ई रावण बइठा हमरा हलवा खाय रहा.. अहिरावण हलवा खाय रहा.. हम बहुत गरियावा संचालक का.. कि हम इत्ते जतन से हलवा बनावा. अउर तुम हिंया सब राक्षसन का खवाय रहे हौ.. अरे रामजी का खवाओ.. सीताजी का खवाओ..