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रक्षाबंधन: झांसी की रानी ने बांदा के नवाब को भेजी थी राखी, दिलचस्प है इसके आगे की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 22 Aug 2021 05:47 PM IST
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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : सोशल मीडिया
भाई-बहनों के बीच प्रेम और सौहार्द का प्रतीक रक्षाबंधन बुंदेलखंड में सांप्रदायिक सौहार्द का भी पर्व है। इसकी बुनियाद 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने बांदा के तत्कालीन नवाब अली बहादुर सानी को राखी भेजकर डाली थी।
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रानी लक्ष्मीबाई और नवाब बांदा के पत्र (स्रोत परिजन)
- फोटो : अमर उजाला
चिट्ठी शुद्ध बुंदेली भाषा में लिखी थी। जिसका सार यह था कि अंग्रेजों से लड़ना बहुत जरूरी है। पत्र पाते ही शीघ्र मदद को आएं। इतिहासकार बताते हैं कि रानी झांसी की राखी और हस्तलिखित पत्र मिलते ही नवाब अली बहादुर अपने 10 हजार सैनिकों की फौज लेकर झांसी कूच कर गए।
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नवाब अली बहादुर सानी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, उनके पहुंचने से पहले ही रानी झांसी के किले से कूदकर कालपी की ओर निकल गईं। नवाब और फिरंगी सेना में किले के बाहर भीषण संग्राम हुआ। काफी तादाद में अंग्रेज सैनिक मारे गए थे।
नवाब जुल्फिकार बहादुर चतुर्थ
- फोटो : amar ujala
रानी द्वारा नवाब को भेजा गया हस्तलिखित पत्र
हमारी राय है कि विदेशियों का शासन भारत पर न भव चाहिजे और हमको अपुन कौ बड़ौ भरोसौ है और हम फौज की तैयारी कर रहे हैं। सो अंग्रेजन लड़वौ बहुत जरूरी है। पाती समाचार देवै में आवे। यह पत्र कलम और स्याही से लिखा प्रतीत होता है। इसमें न तो कोई विराम है और न शब्दों में कोई स्पेस (दूरी) है।
हमारी राय है कि विदेशियों का शासन भारत पर न भव चाहिजे और हमको अपुन कौ बड़ौ भरोसौ है और हम फौज की तैयारी कर रहे हैं। सो अंग्रेजन लड़वौ बहुत जरूरी है। पाती समाचार देवै में आवे। यह पत्र कलम और स्याही से लिखा प्रतीत होता है। इसमें न तो कोई विराम है और न शब्दों में कोई स्पेस (दूरी) है।
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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : सोशल मीडिया
नवाब की परंपरा को कायम किए हैं वंशज
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नवाब अली बहादुर सानी का वंशज अभी भी इंदौर में आबाद है। उनके परपोते नवाब जुल्फिकार बहादुर चतुर्थ ने बताया कि वह आज भी अपने बुजुर्ग अली बहादुर सानी की परंपरा को सम्मान देते हुए बरकरार रखे हुए हैं। हर साल रक्षाबंधन में हिंदू बहनें उन्हें आज भी राखी बांधतीं हैं। इंदौर में फ्रीडम फाइटर नाम से स्कूल संचालित कर रहे हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नवाब अली बहादुर सानी का वंशज अभी भी इंदौर में आबाद है। उनके परपोते नवाब जुल्फिकार बहादुर चतुर्थ ने बताया कि वह आज भी अपने बुजुर्ग अली बहादुर सानी की परंपरा को सम्मान देते हुए बरकरार रखे हुए हैं। हर साल रक्षाबंधन में हिंदू बहनें उन्हें आज भी राखी बांधतीं हैं। इंदौर में फ्रीडम फाइटर नाम से स्कूल संचालित कर रहे हैं।