मोदी मैजिक के सहारे यूपी में एेतिहासिक जीत हासिल कर सत्ता में आई बीजेपी ने याेगी अादित्यनाथ काे सूबे का मुख्यमंत्री बनाया। इसके लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक खूब मंथन हुआ। तमाम दावेदारों के नामों पर चर्चा हुई और अब योगी आदित्यनाथ के नाम पर ही मुहर लगी। अागे पढ़िए आखिर कौन सी ऐसी वजहें रहीं जिसके चलते योगी आदित्यनाथ काे यूपी की कुर्सी साैंप दी गई...
ये है याेगी काे CM बनाने का राज, जानकर हैरान हाे जाएंगे
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प्रचंड बहुमत से BJP की हिचकिचाहट खत्म
403 में 325 सीटों पर जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आई बीजेपी के सामने सीएम के नाम को लेकर कोई दुविधा नहीं दिखी। कारण है बहुमत इतना बड़ा मिला कि मोदी और अमित शाह के सामने किसी के पक्ष में भी फैसले लेने की आजादी थी। सबसे बड़े दावेदार राजनाथ सिंह ने अपना नाम वापस ले लिया और इसके बाद योगी आदित्यनाथ केशव मौर्य और मनोज सिन्हा जैसे दावेदारों के पीछे छोड़ते हुए सीएम की रेस में सबसे आगे हो गए।
कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि
योगी आदित्यनाथ संघ के भी करीबी माने जाते हैं. गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं और हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। लव जेहाद और राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर वे अपना कट्टर रुख अक्सर दिखाते रहे हैं। हिंदू वाहिनी के जरिए आदित्यनाथ हिन्दू युवाओं को एकजुट कर सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी मुद्दों पर पूर्वांचल में माहौल अपने पक्ष में रखने में कामयाब रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के वादे के साथ यूपी की सत्ता में आई बीजेपी के लिए योगी आदित्यनाथ की ये छवि काफी काम आ सकती है।
तगड़ी जमीनी पकड़ और लंबा राजनीतिक अनुभव
योगी आदित्यनाथ पांच बार से लगातार गोरखपुर के सांसद रहे हैं। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से 2014 में तीन लाख से भी अधिक सीटों से चुनाव जीते थे। 2009 में दो लाख से भी अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। पूर्वांचल की 60 से अधिक सीटों पर योगी आदित्यनाथ की पकड़ मानी जाती है।
पूर्वांचल पर मोदी का फोकस
2014 में जब नरेंद्र मोदी वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ने उतरे थे तभी संकेत मिल गया था कि यूपी की जंग जीतने के लिए बीजेपी पूर्वांचल पर पूरा फोकस रखेगी। लोकसभा की 80 में से 73 सीटें बीजेपी और सहयोगियों ने जीत ली। अब विधानसभा चुनाव में भी पूर्वांचल की अधिकांश सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं। ऐसे में सीएम पूर्वांचल से होगा इसके बारे में लंबे समय से कयास लग रहे थे। हालांकि, पहले मनोज सिन्हा का नाम आगे चल रहा था लेकिन आखिरी रेस में योगी उड़ान भरते दिखे।