{"_id":"5cf0f3c1bdec22070d45acfe","slug":"sadhvi-niranjan-jyoti-gets-minister-post-in-modi-cabinet","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"साध्वी निरंजन ज्योति के गरीबी के वो दिन जो लोगों के लिए बन गए प्रेरणा के स्रोत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साध्वी निरंजन ज्योति के गरीबी के वो दिन जो लोगों के लिए बन गए प्रेरणा के स्रोत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 31 May 2019 02:58 PM IST
विज्ञापन
साध्वी निरंजन ज्योति(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीति और धर्म-अध्यात्म में शिखर तक पहुंची साध्वी निरंजन ज्योति का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। यह बताने में गुरेज नहीं करती हैं कि वह बचपन में पिता के साथ काम के बदले अनाज योजना में पत्योरा पंप कैनाल की खोदाई करने जाती थीं। मजदूरों के साथ फावड़ा भी चलाती थीं।
Trending Videos
साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव में वर्ष 1967 में साध्वी निरंजन ज्योति का जन्म हुआ था। घर में पिता स्व. शिव प्रसाद और माता शिवकली के साथ वह भी पूजा-पाठ करती थीं। साथ ही हवन पूजन में उनका मन लगता था। कठिनाई भरे रास्ते पर चलकर साध्वी न सिर्फ केंद्रीय राज्यमंत्री बनीं बल्कि निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपाधि भी हासिल की। जनवरी 1982 में साध्वी ने घर छोड़नेे का निर्णय लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
इसके बाद वह स्वामी अच्युतानंद जी के संपर्क में आई। साध्वी ने स्वामी के मूसानगर कानपुर देहात के आश्रम में रहकर योग और वेदांत की शिक्षा ली। इसके बाद हरिद्वार में स्वामी परमानंद जी के सानिध्य में गीता उपनिषद, ब्रह्म सूत्र का अध्ययन किया। वर्ष 1984 में अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोलने के लिए आंदोलन शुरू हो चुका था।
पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
इस दौरान मुस्लिम नेता सहाबुद्दीन ने राम जन्म भूमि में नमाज अदा करने का एलान कर दिया। साध्वी ने 1988 में विहिप से जुड़कर हरिद्वार से अयोध्या तक मार्च किया। स्वामी परमानंद जी महाराज के नेतृत्व में गंगा को घाटों में लाने का अभियान चलाया। 1993 में गुरु अच्युतानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद उन्होंने स्वामी परमानंद जी महाराज के सानिध्य में विहिप के कार्यक्रमों प्रतिभाग करना शुरू किया।
विज्ञापन
साध्वी निरंजन ज्योति (फाइल फोटो)
वर्ष 2002 में पहली बार हमीरपुर से भाजपा से टिकट लेकर साध्वी चुनाव लड़ीं, लेकिन पांच हजार वोटों से हार गईं। 2007 में दोबारा विधायक पद के चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। 2012 में फिर चुनाव लड़ीं और जीतीं।

कमेंट
कमेंट X