नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में दूसरी बार राज्यमंत्री बनीं यूपी के फतेहपुर की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति का गरीबी से नाता रहा है। वह पिता के साथ मजदूरी करतीं थीं। सूखा पड़ने पर सरकार के राहत कार्यक्रम में पिता के साथ फावड़ा भी चलाया था। परिवार के हालात आज भी पहले जैसे हैं।
अध्यात्म से मोदी के मंत्रालय तक साध्वी, पिता के साथ मजदूरी कर गुजारे दिन, देखिए वो कच्ची दीवारें
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जनपद के सुमेरपुर विकासखंड के बीहड़ी गांव पत्योरा निवासी साध्वी निरंजन ज्योति के छोटे भाई रमेश निषाद कहते हैं कि परिवार की गरीबी अभी दूर नहीं हुई है। 1975 से 80 तक साध्वी निरंजन ज्योति ने पिता शिवप्रसाद निषाद के साथ मेहनत मजदूरी में हाथ बटाया है।
तीन भाइयों के बीच 11 बीघे जमीन हैं। खेती से साल भर का गुजर-बसर न होने के कारण मेहनत-मजदूरी करती रही हैं। 80 के दशक में सूखा पड़ा तो संपर्क मार्ग, नहर की खुदाई का कार्य गांव में हुआ। तब साध्वी निरंजन ज्योति ने फावड़ा चलाकर परिवार के साथ हाथ बंटाया। साध्वी ने 1982 के बाद वैराग्य धारण कर लिया। वह कानपुर जिले के मूसानगर कस्बे में स्वामी अच्युतानंद महाराज की शिष्या बन गईं। इसके बाद 1990 में स्वामी परमानंद महाराज के सानिध्य में आईं।
साध्वी ने वर्ष 2000 में भाजपा की सदस्यता ली थी। 19 साल के राजनीतिक सफर में विधायक और सांसद बनने के साथ नई ऊंचाइयों पर पहुंचीं और इस बार ग्रामीण विकास राज्यमंत्री के पद की शपथ लीं। इससे उनका गांव खुशी से झूम उठा। खास यह कि यहां के लोग उनकी तरह केवल गांव की ही बात नहीं करते, वे पूरे देश के विकास की बात करते हैं।
गांव के बलवान सिंह कहते हैं कि विधायक बनने के पहले साध्वी ने गांव में पीने के पानी के इंतजाम की पहल की। इसी का नतीजा है कि आज पानी की टंकी स्थापित है। फरवरी 2018 में उन्होंने गांव में चौपाल लगाई थी। तब यमुना नदी में पुल निर्माण कराने का वादा किया था।
विधायक बनने के बाद ही फतेहपुर में पैठ बनाने लगी थीं साध्वी
जनपद के सुमेरपुर विकासखंड के बीहड़ी गांव पत्योरा में जन्मी साध्वी निरंजन ज्योति ने राजनीति में आने पर जन्मभूमि को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया। वह क्षेत्र में रहकर लोगों की समस्याओं के लिए संघर्ष करती रहीं। हालांकि हमीरपुर सदर विधानसभा से उनको दो बार 2002 और 2007 में पराजय मिली। पहली बार 32674 मत मिले, जबकि 2007 में 24164 वोट ही मिल सके। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने 2012 में भी उन पर विश्वास जताया।
इस बार वह 7824 मतों से जीत गईं। साध्वी के रूप में सदर विधानसभा सीट से किसी महिला ने पहली बार जीत हासिल की। विधायक बनने के बाद सदर विधानसभा क्षेत्र के साथ वह फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र में भी अपनी पैठ बनाने लगीं। यहां से वह 2014 का लोकसभा चुनाव जीतीं। हाईकमान ने 2019 में फिर उन पर विश्वास जताया और इस बार उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की।
प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से ली
यमुना नदी के बीहड़ों में बसे पत्योरा गांव के कन्या प्राथमिक स्कूल में ककहरा सीखा। इसी स्कूल में पढ़ी साध्वी के आगे बढ़ने की ललक और कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश ने तमाम बाधाओं को ही सीढ़ियां बना लिया। केंद्र में दोबारा मंत्री पद की शपथ लेने के बाद हर कोई पत्योरा में चर्चा कर रहा है। गांव के प्राइमरी पाठशाला के सेवानिवृत्त टीचर रामकिशन कहते हैं कि उन्होंने तो नहीं लेकिन सिमनौड़ी के गोकुल प्रसाद और कुशलपुर के शिवनारायण ने उन्हें पढ़ाया है।
मूसानगर आश्रम में बीता ज्यादातर समय
राज्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली फतेहपुर की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति की शादी कानपुर जिले के अकबरपुर गांव में 14 वर्ष की उम्र में मुंशी प्रसाद निषाद से हुई थी। लेकिन एक साल ही ससुराल में निभा सकीं। ससुराल छोड़ने के बाद फिर नहीं गईं और अपने पिता के पास आकर रहने लगीं। बताते हैं कि मुंशी प्रसाद ने दूसरी शादी कर ली। साध्वी का ज्यादातर समय मूसानगर स्थित आश्रम में बीता। अभी भी वह मूसानगर ही आती-जाती हैं।