"एक साल का हाल" Deputy CM के 'दौरे और वादों' पर ये है 'एक्सपर्ट कमेंट'
प्रभारी मंत्री के रूप में केशव प्रसाद मौर्य ने छह जुलाई 2017 को जिला योजना की बैठक कैंट स्थित ओईएफ गेस्ट हाउस में ली थी। इसमें पीडब्लूडी ने 101 करोड़ रुपये से पुल और सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने बिना नाली-ड्रेनेज सिस्टम के बनाई गईं करोड़ों की सड़कों के खराब होने का मुद्दा उठाया था। इस पर कुछ नहीं हुआ है। इसके बाद कभी भी प्रभारी मंत्री ने विकास कार्यों को लेकर बैठक नहीं की।
सिर्फ घोषणा ही रही
- 23 अगस्त 2017 को उप मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को सहायता सामग्री भेजते समय हरी झंडी दिखाई थी। उस दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि झकरकटी पुल के निर्माण का कार्य जल्द शुरू होगा। अभी तक इस पर काम चालू नहीं हुआ है। हालांकि, एक अड़चन जरूर दूर हुई है।
- उप मुख्यमंत्री ने 23 अगस्त 2017 को कहा था कि शहर में रिंग रोड बनाई जाएगी। इसके लिए जल्द बजट जारी होगा। अभी तक इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार नहीं है।
- उप मुख्यमंत्री ने 23 अगस्त 2017 को कहा था कि सीओडी पुल की दो लेन 31 अक्तूबर 2017 तक चालू हो जाएंगी। इस पुल की एक लेन फरवरी 2018 में चालू हुई है। दूसरी लेन जून में चालू होने की उम्मीद है।
- सात अक्तूबर 2017 को उप मुख्यमंत्री ने कहा था कि 15 सितंबर से कानपुर के विकास की गाड़ी चलेगी। पीडब्लूडी और दूसरे विभागों को बजट जारी होंगे। यह भी छलावा साबित हुआ।
एक्सपर्ट कमेंट
हर मंत्री को जिले का प्रभार देने की व्यवस्था के पीछे सरकार की मंशा जिलों के विकास कार्यों में तेजी लाने की होती है। प्रभारी मंत्री की बैठकों से जिले की समस्याओं का समाधान तेजी से होता है। यूं तो प्रभारी मंत्री के बैठक करने का कोई शासनादेश या नियमावली नहीं है। फिर भी हर माह बैठक का प्रावधान है। प्रभारी मंत्री हर माह विकास कार्यों पर बैठक लेकर प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देंगे तो विकास में तेजी आएगी।
- राम शरण श्रीवास्तव, पूर्व जिलाधिकारी