भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान को संकट मोचन का नाम दिया गया है। मान्यता है कि कलियुग में भी हनुमान संसार में मौजूद हैं। सच्चे मन से उनकी पूजा करने वालों के पलभर में कष्ट दूर हो जाते हैं। पूरे देश में कई स्थानों पर संकट मोचन के चिंह मिलते हैं। कोटद्वार में सिद्ध बली के नाम से संकट मोचन हनुमान का मंदिर है। वहीं मेरठ में भी कई सिद्धपीठ हैं। जहां हनुमानजी विराजमान हैं। अमर उजाला ने शहर के ऐसे ही सिद्धपीठ हनुमान मंदिरों का इतिहास जानने का प्रयास किया है।
हनुमान जन्मोत्सव आज: तस्वीरों के साथ जानिए इन सिद्धपीठ हनुमान मंदिरों का इतिहास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुढ़ाना गेट पर संकट मोचन मंदिर की स्थापना 150 साल पहले ब्रह्मचारी पं. शिवदत्त हरि और उनके भाई ने की थी। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति 15 फिट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित थी। मंदिर परिसर में अखाड़ा भी चलता था। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में पूजा के लिए शहर से ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो भक्त नियमित 40 दिन तक मंदिर में दीया जलाए और विधि विधान से पूजा करे, उनकी कामना पूर्ण होती है। मंदिर के प्रबंधक अनिल पाठक बताते हैं कि वह 1983 से हनुमान जन्मोत्सव मना रहे हैं। मंदिर के प्रथम तल पर श्री राधा-कृष्ण का मंदिर है। इसमें चांदी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
135 साल पहले स्थापित हुई मूर्ति
दिल्ली रोड स्थित टीपीनगर गेट के सामने हनुमान मंदिर है। बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना 135 साल पहले बाबा ज्वाला गिरि ने की थी। मंदिर में शनिवार और मंगलवार को भक्तों की लाइनें लगती हैं। यहां संकट मोचन हनुमान चालीसा का पाठ होता है, उन्हें चोला चढ़ाया जाता है। भक्त मानते हैं कि मंदिर में नियमित 40 दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से हर बाधा दूर हो जाती है।
कैंट स्थित बालाजी मंदिर
वेस्ट एंड रोड पर 1982 में बालाजी मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर के बराबर में हनुमान जी की विशाल मूर्ति है। मंदिर के गर्भगृह में राम दरबार, शिव परिवार, अंजना माता, भैरव और प्रेतराज की मूर्तियां हैं। यहां भगवान के दर्शन करके भक्त शांति का आभास करते हैं। महामंडलेश्वर महंत महेन्द्र दास महाराज बताते हैं कि बालाजी भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए दूर दूर से भक्त आते हैं।
दक्षिणमुखी पंचमुखी हनुमान मंदिर
पीएल शर्मा रोड पर दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में संकट मोचन के पांच मुखों के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि पंचमुखी के स्वरूप में पूर्व दिशा में हनुमान का मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, उत्तर में वराह मुख और दक्षिण में नरसिंह मुख के दर्शन होते हैं। मंदिर का निर्माण 1974 में पं. कैलाशचंद शर्मा ने कराया। पंचमुखी हनुमान मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ उमड़ती है। जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वह भंडारा करते हैं।