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पांडव टीले में छिपे बड़े राज: उत्खनन में मिलीं चूड़ियां, जली हुई हड्डियां-महलों की दीवारें, मृदभांड और मिट्टी के बर्तन, देखें तस्वीरें
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Sun, 20 Feb 2022 03:47 PM IST
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हस्तिनापुर।
- फोटो : amar ujala
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प्राचीन पांडव टीला उल्टाखेड़ा पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कराए जा रहे उत्खनन में शनिवार को राजपूतकालीन के कई प्राचीन अवशेष मिलने की बात कही गई है। इनमें महलों की दीवारें, चित्रित मृदभांड, मिट्टी के बर्तन, चूड़ियां, आग में जली हुई हड्डियां और जानवरों की हड्डियों के अवशेष मिले हैं।
अभी तक की गई खुदाई के दौरान मिले अवशेषों को पुरातत्व विभाग की टीम ने सुरक्षित कर लिया है। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। इसके बाद ही अधिकारिक रूप से स्पष्ट हो सकेगा कि अवशेष किस काल खंड के हैं।
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हस्तिनापुर में उत्खनन।
- फोटो : amar ujala
शनिवार को अधिकारियों ने पुरातत्व विभाग के ऑफिस की ओर लगभग 50 मीटर की दूरी पर एक अन्य स्थान पर खुदाई शुरू की है। यहां पर कुछ हड्डियों के अवशेष, कई प्रकार की कांच की चूड़ियां और मिट्टी के जानवर आकृति के बर्तनों के अवशेष मिले।
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हस्तिनापुर।
- फोटो : amar ujala
इसके बाद यहां और गहनता से जांच की जा रही है। अमृत कूप के पास चल रही खुदाई के दौरान लगभग 10 फीट की गहराई में मिट्टी की छठी लेयर पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। यहां से मिट्टी की जांच के लिए सैंपल लिए गए।
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हस्तिनापुर में उत्खनन।
- फोटो : amar ujala
मिट्टी की परतों का हो रहा गहनता से अध्ययन
विभिन्न काल के खंडों और उनसे जुड़े अवशेषों की जानकारी के लिए मिट्टी की परतों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। गड्ढों से मिली बालू मिट्टी की परतों का अलग-अलग सैंपल सुरक्षित किया जा रहा है। बालू, रेत और मिट्टी की प्रयोगशाला में कार्बन डेंटिंग की जाएगी।
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हस्तिनापुर।
- फोटो : amar ujala
जल्द ही सामने आएंगे कई रोचक तथ्य
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शोभित यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रियंक भारती ने लंबे समय तक हस्तिनापुर पांडव टीले पर अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि पांडव टीले के उत्खनन से जल्द रोचक तथ्य मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि यहां पूर्व में भी मौर्य कालखंड और कुषाण काल के मृदभांड मिले हैं।
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