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UP: 'कुत्ते मेरे दादा को खा रहे हैं, उन्हें बचा लो', बेबस पोते की चीखें; इशांत की चीखों से सिहर उठा पूरा गांव
Wed, 12 Aug 2026 10:57 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:57 AM IST
सार
मेरठ के जानीखुर्द थाना इलाके के किठौली गांव में मंगलवार को कुत्तों के झुंड ने पोते के सामने दादा लख्मी (58) को नोच-नोचकर मार डाला। वह खेत में ईख की बंधाई करने गए थे। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने एक घंटे तक शव नहीं उठने दिया।
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dog attack
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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मेरठ के जानीखुर्द के किठौली गांव के किसान लख्मी मंगलवार की सुबह हाथ में दरांती लेकर जब ईख बांधने के लिए घर से निकले, तब शायद किसी को इस बात का आभास नहीं था कि यह उनका आखिरी दिन होगा। घर से निकलते समय बेटे जितेंद्र ने पीछे से आवाज दी थी-पिताजी, जल्दी आना। आपका पोता ईशांत कांवड़ लेकर 10 बजे तक आ जाएगा।
किसान लख्मी का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ईशांत की आंखों में खौफ का मंजर
ईशांत घटनास्थल पर एक कोने में बैठा रहा। वह डरावना दृश्य उसकी आंखों में तैरता रहा। वह किसी से बात नहीं कर रहा था। बस रह-रहकर सिहर उठता था। गांव का कोई व्यक्ति जब उसे चुप कराने जातातो वह बस यही कहता था कि-दादाजी को मैं बचा नहीं पाया।
ईशांत घटनास्थल पर एक कोने में बैठा रहा। वह डरावना दृश्य उसकी आंखों में तैरता रहा। वह किसी से बात नहीं कर रहा था। बस रह-रहकर सिहर उठता था। गांव का कोई व्यक्ति जब उसे चुप कराने जातातो वह बस यही कहता था कि-दादाजी को मैं बचा नहीं पाया।
मौक से पुलिस को शव को ले जाने से रोकते हुए ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जब इशांत की चीख से सिहर उठा पूरा गांव
दोपहर के दो बजे लख्मी के बड़े बेटे जितेंद्र की नजरें बार-बार चौखट पर टिक रही थीं। धूप ढलने लगी थी, लेकिन पिता लख्मी का कोई पता नहीं था। कांवड़ लेकर आ चुके ईशांत ने कहा, पापा- मैं दादाजी को बुला लाता हूं। धूप में थक गए होंगे। खाना भी ठंडा हो रहा है।
दोपहर के दो बजे लख्मी के बड़े बेटे जितेंद्र की नजरें बार-बार चौखट पर टिक रही थीं। धूप ढलने लगी थी, लेकिन पिता लख्मी का कोई पता नहीं था। कांवड़ लेकर आ चुके ईशांत ने कहा, पापा- मैं दादाजी को बुला लाता हूं। धूप में थक गए होंगे। खाना भी ठंडा हो रहा है।
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मौक से पुलिस को शव को ले जाने से रोकते हुए ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ईशांत दौड़ते हुए खेत की मेड़ पर पहुंचा। उसने दूर से दादा को आवाज लगाई। कोई जवाब न मिलने पर पास जा कर देखा तो कुत्तों का झुंड दिखाई दिया। जैसे ही वह दो कदम आगे बढ़ा तो 14 साल के इस मासूम की रूह कांप गई। कुत्तों का झुंड उसके दादा के बेजान हो चुके शरीर पर टूट पड़ा था। ईशांत की चीख निकल गई। वह बदहवास होकर उल्टे पांव भागा। उसके पैर कांप रहे थे और जुबान से बस एक ही शब्द निकल रहा था- दादाजी को बचा लो... कुत्ते दादा को खा रहे हैं...।
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घटना के बाद मौके पर विलाप करता मृतक का पुत्र जितेन्द्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जब तक गांव वाले लाठी-डंडे लेकर पहुंचे, लख्मी की सांसें थम चुकी थीं। जिस मिट्टी पर लख्मी ने जिंदगी भर पसीना बहाकर अपने बच्चों का पेट पाला था, वही मिट्टी उनके खून से लाल हो चुकी थी।