दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। हादसे के दौरान कार के एयरबैग भी नहीं खुले। प्रत्यक्षदर्शी और स्कूल बस चालक कुलदीप का कहना है कि यदि सीट बेल्ट लगी होती और एयरबैग खुल जाते, तो शायद तीन दोस्तों नितेश, आशुतोष और शैलेंद्र की जान बचा सकती थी।
Meerut: पांच पलटी खाकर खाई में गिरी कार, नहीं खुले एयरबैग, 'बचाओ' की चीखों के बीच बुझ गई तीन दोस्तों की जिंदगी
मेरठ के दौराला में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर ब्रेजा कार पांच पलटी खाते हुए खाई में जा गिरी। हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कार के एयरबैग नहीं खुले और बचाओ की आवाजें कुछ ही सेकंड में थम गईं।
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बचाओ-बचाओ की आवाजें कुछ ही सेकंड में हो गईं खामोश
कुलदीप ने बताया कि कार पलटने के दौरान उसमें सवार लोग लगातार बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। जैसे ही कार पेड़ से टकराकर रुकी कुछ ही सेकंड बाद उनकी आवाजें पूरी तरह खामोश हो गईं। चीख-पुकार सुनते ही वह दौड़कर मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना दी।
आसपास के लोग भी मदद के लिए पहुंच गए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर कार में फंसे चारों युवकों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। बाद में जब आशुतोष के परिजन अस्पताल पहुंचे तो कुलदीप ने उन्हें हादसे की पूरी जानकारी दी।
नितेश के पिता का हो चुका है निधन
मृतक नितेश के चाचा मणिराम ने बताया कि नितेश के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उसकी मां और एक छोटा भाई हैं। नितेश परचून की दुकान चलाकर पूरे परिवार का पालन-पोषण करता था।
हाल ही में उसने दिल्ली का मकान बेचकर गाजियाबाद में नया घर खरीदा था लेकिन हादसे ने परिवार के सभी सपनों को तोड़ दिया। वहीं आशुतोष के पिता संतोष ने बताया कि आशुतोष एक निजी कंपनी में नौकरी करता था, जबकि वह स्वयं प्रॉपर्टी का कारोबार करते हैं। आशुतोष तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उससे छोटा भाई देवेश और बहन कोमल हैं।
किसे पता था यह सफर आखिरी साबित होगा
परिजनों ने बताया कि चारों दोस्त अक्सर साथ घूमने जाते थे। सुख-दुख, त्योहार या किसी भी मुश्किल में चारों हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर तीन दोस्तों की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
मोबाइल लॉक होने से पहचान में हुई परेशानी
हादसे के बाद मृतकों और गंभीर रूप से घायल मिथुन की पहचान करने में पुलिस को काफी दिक्कत हुई। कार से तीन मोबाइल फोन मिले, जिनमें पैटर्न लॉक लगा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मोबाइलों से सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में लगाए और परिजनों के नंबरों पर कॉल की। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद चारों दोस्तों की पहचान हो सकी।