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कपसाड़ हत्या और अपहरण: 'कम से कम अपनों का दुख तो बांटने दो...', रिश्तेदारों को गांव जाने से रोकने पर फूटा दर्द
शाह आलम त्यागी, अमर उजाला, सरधना/मेरठ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 11 Jan 2026 09:22 AM IST
सार
गाजियाबाद से मेरठ के सरधना इलाके के कपसाड़ गांव पहुंचीं मृतक सुनीता की बड़ी बहन मायादेवी ने कहा कि कम से कम अपनों का दुख तो बांटने दो, पुलिस ने रिश्तेदारों और परिचितों को गांव की सीमा पर रोक दिया। इस पर बहन का दर्द फूट पड़ा।
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Meerut Murder and kidnapping
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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"मेरी बहन मुझे छोड़कर चली गई। वह मेरी बेटी जैसी थी। हमारी मां के गुजर जाने के बाद मैंने उसे मां की तरह पाला। मैं उसके अंतिम दर्शन तो नहीं कर सकी, कम से कम अब तो अपनों का दुख बांटने दो"। ये रुंधे हुए शब्द गाजियाबाद से कपसाड़ गांव पहुंचीं मायादेवी के हैं जो मृतका सुनीता देवी की बड़ी बहन हैं।
मायादेवी बार-बार सुनीता के घर जाने देने के लिए पुलिस से मिन्नतें करती रहीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांव में नहीं जाने दिया। इसके विरोध में मायादेवी वहीं धरने पर बैठ गईं। मायादेवी के अलावा पुलिस ने मृतक सुनीता के कई अन्य रिश्तेदारों और परिचितों को गांव की सीमा पर ही रोक दिया। पाबंदियों के बावजूद अपनों तक पहुंचने की तड़प ऐसी थी कि रिश्तेदारों को पगडंडियों का सहारा लेना पड़ा।
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कपसाड़ में अपनों का दुख बांटने जा रहे रिश्तेदारों को गांव के बाहर रोकने पर रिश्तेदार धरने पर बैठे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब तक बुलडोजर चल चुका होता
अपनों को खोने का गम और प्रशासन की बेरुखी ने ग्रामीणों और सुनीता के रिश्तेदारों में भारी रोष रहा। पुलिस की इस कार्रवाई से आक्रोशित रिश्तेदारों ने भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाकर हंगामा भी किया। रिश्तेदारों ने कहा, अगर यह मामला अनुसूचित जाति के बजाय किसी दूसरे रसूखदार समुदाय से जुड़ा होता तो अब तक आरोपियों पर बुलडोजर चल चुका होता।
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कपसाड़ में सुनीता की हत्या के बाद गमजदा महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रिश्तेदारों के अनुसार, लगभग 10-12 लोग खेतों के रास्ते पैदल छिपते-छिपाते गांव तक पहुंच सके। करीब 40 अन्य रिश्तेदारों को पुलिस ने गांव में प्रवेश नहीं करने दिया और वापस भेज दिया।
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गांव कपसाड़ में मृतक के परिजनों से मिलने पर रोकती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हत्याकांड में नामजद सुनील और दो अज्ञात युवकों की भूमिका पर असमंजस
युवती के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के मामले में दर्ज सनसनीखेज प्राथमिकी में नामजद सुनील राजपूत, दो अज्ञात युवकों की भूमिका को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। मुख्य आरोपी पारस सोम की गिरफ्तारी के बाद भी घटना में शामिल बताए गए अन्य आरोपियों का सुराग नहीं लगा पाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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कपसाड़ में मृतका सुनीता के पुत्र नरसी को सांत्वना देते एसडीएम उदित नारायण सेंगर व सीओ आशुतोष कुमार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुनील को नहीं पकड़ सकी पुलिस
पीड़ित परिवार की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में पारस सोम के साथ सुनील राजपूत और दो अज्ञात युवकों को भी घटना में शामिल बताया गया था। पीड़ित परिवार का कहना कि युवती का अपहरण करने और मां सुनीता की हत्या की साजिश में चारों युवक शामिल थे। हालांकि घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस न तो सुनील को पकड़ सकी है और न ही अज्ञात युवकों की पहचान कर पाई है।
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