देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो उन्हें ढूंढकर सही दिशा देने की। पदक जीतने वाले खिलाड़ी पैदा करने के लिए ग्रास रूट लेवल यानी जमीनी स्तर पर जाना होगा। खिलाड़ियों के लिए यही संदेश है कि वे मोबाइल फोन छोड़कर मैदान को चुनें। यह बातें उड़नपरी और पय्योली एक्सप्रेस नाम से विख्यात पूर्व अंतर्राष्ट्रीय एथलीट पीटी उषा ने पत्रकारों से कहीं। वहीं पीटी उषा से एक दिलचस्प सवाल पूछा गया, जिसका उन्होंने आखिर में जवाब दिया।
देश के लिए 101 पदक जीतने वालीं पीटी उषा से पूछा गया ये दिलचस्प सवाल, जवाब में कही ये बड़ी बात
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पीटी उषा गुरुवार को जागृति विहार स्थित बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित ‘गर्ल्स एंपावरमेंट’ कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं। पीटी उषा ने देश में खेल और खिलाड़ियों के भविष्य के सवाल पर कहा कि उनके जमाने में उतनी सुविधाएं नहीं थी, जितनी खिलाड़ियों को अब मिल रही हैं। सरकार खेलो इंडिया योजना के तहत भारी बजट खर्च कर खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान कर रही है। खिलाड़ी भी मेहनत कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि नीरज चोपड़ा, हिमा दास, दुती चंद और सुधा सिंह जैसे एथलीटों ने अपनी धाक जमाई है। पीटी उषा के पति अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी पी श्रीनिवासन के अलावा बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन धर्मेंद्र शर्मा और प्रधानाचार्य गोपाल दीक्षित भी रहे।
एकेडमी जरूरी, खर्चा न लें
खेलों के लिए एकेडमी होने के सवाल पर पीटी उषा ने कहा कि खेल को बढ़ावा देने के लिए एकेडमी जरूरी है। लेकिन एकेडमी में खिलाड़ियों से खर्चा न लिया जाए। उनकी एकेडमी में 20 लड़कियां ट्रेनिंग ले रही हैं। वहीं खिलाड़ी धैर्य रखें और कड़ी मेहनत करें। उषा ने कहा कि उनके समय में सुविधाएं नहीं थीं। लेकिन उनका पूरा ध्यान खेल पर था। वर्ष 1985 में 10.3 सेकेंड में 100 मीटर का रिकॉर्ड बनाया था। आज भी खिलाड़ी इस रिकार्ड के इर्द गिर्द ही घूम रहे हैं।
खेल कंपनियों में भी पहुंचीं उषा
पीटी उषा शाम को दिल्ली रोड स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचीं। यहां उन्होंने वत्स स्पोर्ट्स में भ्रमण किया। कंपनी में से उन्होंने ट्रैक सूट, टी शर्ट और जूते खरीदे। पति के साथ वे कंपनी देखने आईं। परतापुर स्थित भल्ला स्पोर्ट्स, वीनक्स स्पोर्ट्स भी पहुंचीं।
101 पदक जीते हैं उषा ने
पीटी उषा उड़न परी यूं ही नहीं बनीं। उन्होंने अपने एथलीट कॅरियर में 101 पदक जीते हैं। 16 साल की उम्र में ही उन्होंने 1980 में मास्को ओलंपिक में भारत की सबसे कम उम्र की एथलीट होने का गौरव प्राप्त किया था। एशियाई खेलों में 11 पदक अपने नाम किए, जिसमें 1986 में सियोल में हुए एशियाई खेलों में 4 गोल्ड मेडल जीते थे। पीटी उषा के नाम विश्व कीर्तिमान भी है। जकार्ता में 1985 की एशियाई प्रतियोगिता में उषा ने 100, 200, 400, 400 बाधा, 4 गुना 400 रिले दौड़ में 5 गोल्ड मेडल जीते थे।