आप सभी को 2022 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। साल की शुरुआत में मेरठ आना अपने आप में मेरे लिए बहुत अहम है। भारत के इतिहास में मेरठ का स्थान सिर्फ एक शहर का नहीं है बल्कि मेरठ हमारी संस्कृति, हमारे सामर्थ्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
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मेरठ और आसपास के इस क्षेत्र ने स्वतंत्र भारत को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र रक्षा के लिए सीमा पर बलिदान हो या फिर खेल के मैदान में राष्ट के लिए सम्मान। राष्ट्र भक्ति की अलख को इस क्षेत्र ने सदा सर्वदा प्रज्वलित रखा है।
उन्होंने कहा नूरपुर मढैया ने चौधरी चरण सिंह के रूप में देश को एक विजनरी नेतृत्व दिया। मैं इस प्रेरणा स्थली का वंदन करता हूं। मेरठ क्षेत्र के लोगों का अभिनंदन करता हूं। मेरठ देश की एक और महान संतान मेजर ध्यानचंद जी की भी कर्मस्थली रहा है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम दद्दा के नाम पर कर दिया। आज मेरठ की खेल यूनिवर्सिटी मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित की जा रही है। और किसी यूनिवर्सिटी का नाम मेजर ध्यानचंद जी से जुड़ जाता है तो उनका पराक्रम तो प्रेरणा देता है लेकिन उनके नाम में भी एक संदेश है। उनके नाम में जो शब्द है ध्यान, बिना ध्यान केंद्रित किए, बिना फोकस गतिविधि किए कभी भी सफलता नहीं मिलती है। इसलिए जिस यूनिवर्सिटी का नाम मेजर ध्यानचंद से जुड़ा हो वहां पूरे ध्यान से काम करने वाले नौजवान देश का नाम रोशन करेंगे। मैं उत्तर प्रदेश के नौजवानों को यूपी की पहली खेल यूनिवर्सिटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
उन्होंने कहा 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह आधुनिक यूनिवर्सिटी दुनिया की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में से एक होगी। यहां युवाओं को खेलों से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं तो मिलेंगी ही खेल को कैरियर के रूप में अपनाने के लिए जरूरी स्किल का निर्माण भी होगा। यहां से हर साल 1000 से अधिक बेटे-बेटियां बेहतरीन खिलाड़ी बनकर निकलेंगे।
क्रांतिवीरों की नगरी खेलवीरों की नगरी के रूप में भी अपनी पहचान को और सशक्त करेगी। यूपी में जब पहलों की सरकार थी तब यूपी में अपराधी अपना खेल खेलते थे। माफिया अपना खेल खेलते थे। पहले यहां अवैध कब्जे के टूर्नामेंट होते थे। बेटियों पर फब्तियां कसने वाले खुलेआम घूमते थे। मेरठ और आसपास के लोग कभी भूल नहीं सकते कि लोगों के घर जला दिए जाते थे। पहले की सरकार अपने खेल में लगी रहती थी। पहले की सरकारों के खेल का ही नतीजा था कि लोग अपना पुश्तैनी घर छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो गए थे।