मेरठ के खरखौदा में खंदावली गांव में डकैतों ने कहर बरपाते हुए किसान सहकारी सेवा समिति के रिटायर्ड कर्मचारी जयप्रकाश त्यागी की हत्या कर दी। पीड़ित पक्ष ने इंसाफ मांगा तो बदले में पुलिस ने लाठियां बरसा दीं।
पहले डकैतों ने बरपाया कहर, फिर पुलिस ने बरसाईं लाठियां, विधायक के सामने पीड़ितों पर लाठीचार्ज
जयप्रकाश के बेटे सतेंद्र त्यागी ने कहा कि उसके पिता की तिजोरी में पांच-छह लाख रुपए हर समय होते थे। पुलिस शनिवार सुबह से ही मामले में लीपापोती करने में जुटी थी। मामले को संदिग्ध बताकर डकैती या लूट की धारा नहीं लगाई। जबकि पुलिस हमसे बार बार तिजोरी में पैसे की जानकारी ले रही थी।
पुलिस के ढुलमुल रवैये की जानकारी पीड़ित परिवार ने भाजपा के क्षेत्रीय विधायक सत्यवीर त्यागी को दी। विधायक ने एक मीटिंग में होने की बात कह दी। उसके बाद सतेंद्र ने सपा नेता ओमपाल गुर्जर को कॉल की। सपा नेता ओमपाल गुर्जर कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंच गए। डकैती की धारा न लगाने पर आपत्ति जताकर ओमपाल सतेंद्र त्यागी के साथ खरखौदा थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
विधायक के पहुंचते ही नारेबाजी
थाने के बाहर धरने पर बैठने की जानकारी लगते ही भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी मौके पर पहुंचे। विधायक को देखते ही लोगों ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। विधायक धरने पर नहीं रुके और थाने में पहुंचे। पीड़ित परिवार के लोग विधायक ने अंदर बुलाए, लेकिन वह नहीं गए।
थाने के बाहर धरना और नारेबाजी होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। सपा नेता ओमपाल को पुलिस ने जमकर पीटा और फिर साथियों के साथ हवालात में बंद कर दिया। इसकी सूचना पर सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर भी पहुंच गए और थाने में डेरा डाल दिया।
नहीं दिखाई तहरीर
डकैती के दौरान बुजुर्ग जयप्रकाश त्यागी की हत्या से लोगों में जबर्दस्त आक्रोश था। पुलिस उनके शव को पोस्टमार्टम हाउस ले गई। लेकिन एफआईआर की कॉपी देखते ही पीड़ित परिवार का गुस्सा फूट गया। बोले कि हत्या के साथ डकैती या लूट की धारा क्यों नहीं लगाई। आखिर किसकी तहरीर पर केस दर्ज किया। वह बार-बार तहरीर पढ़ने की बात कह रहे थे। लेकिन पुलिस ने नहीं दिखाई। गुस्से के बीच पुलिस ने लाठी चला दी।
बखेड़े के बाद बढ़ाई धारा
बखेड़ा होने पर आईजी रेंज प्रवीण कुमार पहुंचे। पीड़ित परिवार से बात की और थाना पुलिस को फटकार लगाई। कहा कि उनकी शिकायत पर तुरंत मुकदमे में लूट की धारा बढ़ाई जाए।
पुलिस की जांच में जो सही होगा, वह आगे की कार्रवाई में हो जाएगा। उसके बाद ही पुलिस ने मुकदमे में लूट की धारा बढ़ाई। पीड़ित परिवार का कहना कि पुलिस ने बेवजह मामले को तूल दिया। धारा न लगने पर आक्रोश था, पुलिस शुरू में उनकी बात मान लेती तो शायद यह नौबत नहीं आती।