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हस्तिनापुर के इस मंदिर पर लाख कोशिशों के बावजूद कोई नहीं बनवा सका छत, हर तरीका हुआ फेल

Thu, 20 Feb 2020 11:01 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 20 Feb 2020 11:01 AM IST
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wired story: no one could have made a roof upon this shiva temple in hastinapur
फिरोजपुर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर अपने आप में ऐतिहासिक खजाना संजोए हुए है। महाभारत की इस भूमि पर आज भी ऐसे प्रमाण हैं जो लोगों को अनोखे इतिहास की गाथा सुनाते हैं। इन्हीं में से एक बहसूमा का शिव मंदिर जो कई सौ साल से बिना छत के ही है। लाख कोशिशों के बावजूद लोग मंदिर पर छत बनावाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। आज भी अपनी इस खासियत के लिए यह मंदिर दूर दूर तक प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के दिन यहां मेला लगता है।

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फिरोजपुर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

गंगा पुत्र पितामह भीष्म की प्राचीन नगरी बहसूमा व हस्तिनापुर और उसके आसपास की धरती स्वयं में ऐतिहासिक खजाना संजोये हैं। जिसमें से एक है दुर्वाषा ऋषि द्वारा स्थापित ऐतिहासिक फिरोजपुर महादेव मंदिर। जो कि आज भी बिना छत के है। हर शिवरात्रि पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

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फिरोजपुर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

बताया जाता है कि दुर्वाषा ऋषि ने इस महादेव मंदिर को स्थापित किया था। वे यहां तपस्या करते थे। तभी से यह मंदिर यहां स्थित है। यहां लोग दूर दूर से अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव की आराधना कर जल चढ़ाते हैं। माना जाता है कि महादेव मंदिर में जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूरी होती है।

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फिरोजपुर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

बताया जाता है कि महाभारत युद्ध के दौरान कुंती व गांधारी इस मंदिर में दुर्वाषा ऋषि से अपने पुत्रों की विजयश्री का अशीर्वाद लेने आई थीं। वर्ष में दो बार यहां मेला लगता है। जहां शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं।

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फिरोजपुर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

कई सौ सालों से सावन व फाल्गुन माह में यहां जलाभिषेक किया जाता है। इसी दौरान यहां विशाल कावड़ मेला लगता है। किंवदंति है कि मंदिर में आजतक छत नहीं पड़ पाई है। मंदिर के पुजारी धर्मपाल ने बताया कि छत डालने का कई बार प्रयास किया जा चुका है, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ जाती है। नतीजन यह मंदिर बिना छत के ही है। 

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