शामली के चर्चित धर्मांतरण प्रकरण में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। सनातन धर्म में वापसी के बाद आयुष मलिक ने 15 दिन का मौन व्रत शुरू कर दिया। इस अवसर पर शहर स्थित हनुमान धाम में बघरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज के सानिध्य में हनुमान चालीसा का पाठ कराया गया।
Conversion:15 दिन का मौन व्रत, न किसी से मिलेंगे आयुष, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग तेज, उलमा ने कही ये बात
Ayush Conversion Case Shamli: शामली के चर्चित धर्मांतरण प्रकरण में आयुष मलिक ने 15 दिन का मौन व्रत शुरू किया है। वहीं हनुमान धाम में हनुमान चालीसा पाठ हुआ, जबकि पुलिस आयुष के बयान दर्ज करने और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी में जुटी है।
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15 दिन तक किसी से नहीं करेंगे मुलाकात
मुजफ्फरनगर के बघरा आश्रम के स्वामी यशवीर महाराज ने बताया कि आयुष ने 15 दिन का मौन व्रत शुरू किया है और इस अवधि में वह किसी से मुलाकात नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आयुष पिछले सात दिनों से नियमित पूजा-अर्चना कर रहा है तथा अपने घर में मंदिर स्थापित कर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की हैं।
उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धा और आस्था के साथ कराया गया। साथ ही लोगों से अपनी इच्छा के अनुसार सनातन धर्म में घर वापसी करने का आह्वान भी किया।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की उठाई मांग
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि उन्होंने चार जून को यह मामला उठाया था, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और शामली पुलिस का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही आरोप लगाया कि मामले में अभी भी कई आरोपी फरार हैं।
उन्होंने पुलिस से सभी वांछित आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की, ताकि मामले का शीघ्र निस्तारण हो सके।
पुलिस बोले-जल्द दर्ज होंगे आयुष के बयान
आयुष के पिता देवराज मलिक ने बेटे की घर वापसी पर खुशी जताते हुए सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
वहीं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। वहीं पुलिस आयुष के बयान भी दर्ज करने की तैयारी में है।
उलमा ने रखा अपना पक्ष
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिलाध्यक्ष मौलाना साजिद कासमी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी धर्म को अपनाने या छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
सभी धर्म सम्मान के योग्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस्लाम स्वीकार करने के बाद स्वयं अपने पूर्व धर्म में लौटता है, तो इस्लामी दृष्टि से उसका निकाह समाप्त माना जाता है।