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नगर वधुओं ने किया नृत्य: महाश्मशान पर अश्रुओं से बाबा नटराज को दी भावांजलि, शृंगार; वर्षों से चली आ रही परंपरा

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 25 Mar 2026 11:43 PM IST
सार

Varanasi News: महाश्मशान घाट पर होने वाली वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन हुआ। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक करुण पुकार थी। नगर वधुओं ने बाबा से मन्नत मांगी कि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिले और उनका अगला जन्म सुधरे।

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Courtesans Perform Dance Offering Heartfelt Tribute to Lord Nataraj Amidst Tears at Cremation Ground
मणिकर्णिका घाट पर हुआ भव्य आयोजन। - फोटो : संवाद

मणिकर्णिका घाट पर श्रीश्री 1008 बाबा महाश्मशाननाथ का चैत्र नवरात्र की पंचमी से सप्तमी तक चलने वाले त्रिदिवसीय शृंगार महोत्सव बुधवार को समापन हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन श्मशान की राख और जलतीं चिताओं के बीच भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि शव लोक साक्षात् शिवलोक में परिवर्तित हो गया।



बाबा महाश्मशान नाथ और माता मशान काली का रजनीगंधा, गुलाब और सुगंधित फूलों से अलौकिक शृंगार किया गया। शाम को तांत्रिक विधान और पंचमकार भोग के साथ बाबा की भव्य आरती उतारी गई। मान्यता है कि बाबा को प्रसन्न करने के लिए स्वयं शक्ति ने योगिनी रूप धरा था, इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पूरे प्रांगण को दिव्य रूप दिया गया।

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Courtesans Perform Dance Offering Heartfelt Tribute to Lord Nataraj Amidst Tears at Cremation Ground
बाबा का दी भावांजलि। - फोटो : संवाद

आरती के बाद काशी की नगर वधुओं ने अपनी परंपरा को जीवित रखते हुए बाबा के चरणों में गायन और नृत्य के माध्यम से भावांजलि अर्पित की। जलती चिताओं के बीच जब नगरवधुओं ने घुंघरू बांधकर नृत्य शुरू किया, तो वहां मौजूद हर भक्त की आंखें डबडबा गईं। 

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Courtesans Perform Dance Offering Heartfelt Tribute to Lord Nataraj Amidst Tears at Cremation Ground
बाबा महाश्मशाननाथ का हुआ शृंगार। - फोटो : संवाद

नृत्यांजलि के बाद बाबा का भव्य जागरण प्रारंभ हुआ। कलाकारों ने दुर्गा दुर्गति नाशिनी..., डिमिक डिमिक डमरू कर बाजे... और खेले मसाने में होरी... जैसे भजनों से वातावरण को शिवमय कर दिया। दादरा, ठुमरी और चैती की तानों के साथ ओम मंगलम ओंकार मंगलम... और बम लहरी... के जयकारों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। 

Courtesans Perform Dance Offering Heartfelt Tribute to Lord Nataraj Amidst Tears at Cremation Ground
वर्षों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन। - फोटो : संवाद

आयोजन में अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, व्यवस्थापक गुलशन कपूर, उपाध्यक्ष संजय प्रसाद गुप्ता और महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम में महंत संजय झींगरन, विजय शंकर पांडे, दिलीप यादव, संजय गुप्ता, दीपक तिवारी, अजय गुप्ता, रिंकू पांडेय, मनोज शर्मा और विजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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Courtesans Perform Dance Offering Heartfelt Tribute to Lord Nataraj Amidst Tears at Cremation Ground
मणिकर्णिका घाट पर हुआ भव्य आयोजन। - फोटो : संवाद

सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा
मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। जब राजा मानसिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, तब श्मशान की विभीषिका के कारण कोई भी संगीत कलाकार यहां आने को तैयार नहीं हुआ। राजा मानसिंह को दुखी देख काशी की नगरवधुओं ने संदेश भिजवाया कि यदि उन्हें अवसर मिले, तो वे संगीत के जनक नटराज को अपनी सेवा अर्पित करना चाहती हैं। राजा ने सहर्ष उन्हें आमंत्रित किया और तब से यह अटूट परंपरा बन गई। आज भी बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के, नगर वधुएं चैत्र नवरात्रि की सप्तमी को स्वयं मणिकर्णिका घाट पहुंच जाती हैं।

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