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जानिए, उस महिला के बारे में जिसने बनारस में दिनदहाड़े फूंक दी वॉल्वो बस, लोग देखते रह गए

Thu, 20 Sep 2018 01:15 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 20 Sep 2018 01:15 PM IST
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Know about that women who put fire in volvo bus
varanasi - फोटो : amar ujala

बुधवार को एक महिला ने वाराणसी कैंट बस अड्डे पर खड़ी वाल्वो बस में पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। आग की लपटों में घिरी बस देख यात्रियों, रोडवेज कर्मियों और दुकानदारों में भगदड़ मच गई। आननफानन में 60 से ज्यादा बसों को बस अड्डे से बाहर निकाला गया। बस अड्डे पर मौजूद लोगों ने उस महिला को पकड़ कर रोडवेज पुलिस चौकी को सौंप दिया। लगभग एक घंटे तक अफरातफरी की स्थिति रही। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....

 
Know about that women who put fire in volvo bus
vandna raghuvanshi - फोटो : अमर उजाला

सिगरा थाने में उस महिला के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस हिरासत में वंदना ने बताया कि एक अरसे से उसके संगठन के लोग पूर्वांचल राज्य की मांग के लिए अनशन कर रहे हैं।  वाल्वो बस को आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार वंदना रघुवंशी एक संगठन पूर्वांचल राज्य जनांदोलन की वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव हैं। यह संगठन अलग पूर्वांचल राज्य की मांग कर रहा है। समय समय पर छोटे प्रदर्शन करता रहता है। कैंट रेलवे स्टेशन, मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन व सिटी स्टेशन पर 14 बार ट्रेन रोकने की भी कोशिश कर चुका है। 
 
Know about that women who put fire in volvo bus
varanasi - फोटो : amar ujala

इस संगठन की स्थापना सितंबर 2013 में हुई थी। पांच जून 2016 को इस संगठन ने पहला प्रदर्शन किया। इस संगठन की प्रमुख मांग है कि  पूर्वांचल राज्य बने और काशी को इसकी राजधानी बनाया जाए। इसके सक्रिय सदस्यों की संख्या 200 के लगभग है और इनमें 50 पदाधिकारी हैं। हालांकि संगठन अपने साथ पूर्वांचल के लाखों लोगों के जुड़े होने का दावा करता है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अनुज रही हैं। 2017 में अप्रैल और सितंबर में कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकने का प्रयास हुआ। 



 
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varanasi - फोटो : amar ujala

इसे लेकर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इसी प्रकार सिटी और मंडुवाडीह पर प्रदर्शन के बाद मुकदमा दर्ज हुआ।  इस संगठन के कुछ पदाधिकारी 15 अगस्त से अनशन पर हैं। पहले लहुराबीर से अनशन शुरू हुआ। हालत बिगड़ने पर सभी को कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल में भर्ती करा दिया था। तब से अनशन वहीं चल रहा है। संगठन के प्रवक्ता राजेश पांडेय ने दावा किया कि पीएम मोदी के दौरे से पहले ही 16 सितंबर की शाम प्रशासन ने वंदना रघुवंशी को घर में नजरबंद कर दिया था और 18 सितंबर की शाम को छोड़ा गया।  

 
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varanasi - फोटो : amar ujala

वंदना को जब पुलिस चौकी ले जाया जा रहा था तो वह चिल्ला रही थी मीडिया ने हमें दिखाना बंद कर दिया है। अब वह दिखाएगा। उसने लोगों की तरफ पंफलेट उछालते हुए कहा कि लो पढ़ लो सब लोग। हमारी तो जिंदगी तबाह हो गई। 
 
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