मालटारी-मिर्जापुर स्थित विद्युत उपकेंद्र के पास तेल से भरे टैंकर में लगी आग इतनी विकराल थी कि उसमें सवार चालक, खलासी और पेट्रोल पंप कर्मचारी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि टैंकर पलटते ही तेज धमाके के साथ आग की लपटें उठने लगीं और कुछ ही मिनटों में पूरा टैंकर आग का गोला बन गया। आसपास मौजूद लोग चाहकर भी किसी की मदद नहीं कर सके। दमकल की गाड़ियां पहुंचने तक टैंकर पूरी तरह आग की चपेट में आ चुका था।
झपकी ने ली तीन लोगों की जान: जली हुई शर्ट से भाई को पहचाना, भीषण आग देख हर कोई सहमा; चार घंटे में सबकुछ खाक
Azamgarh News: आग लगने की सूचना पाकर माैके पर जीयनपुर कोतवाली की पुलिस भी पहुंच गई। इसके पहले दमकल विभाग को भी सूचित कर दिया गया था। आग इतनी भयावह थी कि कोई उसमें फंसे लोगों की सहायता नहीं कर पा रहा था। आग बुझने के बाद लोग अपनों की लाशें खोज रहे थे।
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इकलौते बेटे रामू की दिसंबर में होनी थी शादी, जुलाई में शुरू की थी नौकरी
मालटारी हादसे में जान गंवाने वाले महाराजगंज जिले के फरेंदा थाना क्षेत्र के गढ़वा गांव निवासी रामू यादव (20) अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। परिजनों के अनुसार उसकी शादी दिसंबर में तय थी और घर में तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। हादसे की सूचना मिलते ही खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, फरेंदा थाना क्षेत्र के चौतरवा गांव निवासी पतिराज प्रसाद (25) पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर था।
परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाने के लिए उसने हाल ही में टैंकर पर खलासी का काम शुरू किया था। परिजनों ने बताया कि रामू यादव और पतिराज प्रसाद ने जुलाई माह में ही टैंकर पर एक साथ काम शुरू किया था। दोनों साथ ही ड्यूटी करते थे और दुर्भाग्य से एक ही हादसे में दोनों की जिंदा जलकर मौत हो गई। इस घटना से दोनों परिवारों में मातम पसरा है और गांव में शोक का माहौल है।
क्रेन से हटाया गया जला टैंकर, 30 से अधिक गांवों की बिजली गुल
टैंकर की टक्कर से ट्रांसफार्मर लगा बिजली का पोल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे मालटारी-मिर्जापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 30 से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति 20 घंटे तक ठप हो गई। अंजान शहीद, नदौरा, देवापार, पारीपट्टी, राजूपट्टी, गडेरीपट्टी, पकवाइनार, पतार, बगवार, नूरुद्दीनपुर और छतरपुर समेत कई गांवों में पूरी रात अंधेरा छाया रहा। उमस भरी गर्मी में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी और छोटे उद्योग-धंधे भी प्रभावित हुए। मंगलवार को बिजली विभाग ने नया पोल और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य शुरू कराया। वहीं, जले हुए टैंकर को क्रेन की मदद से सड़क से हटाया गया।
11.30 घंटे तक बंद रहा जीयनपुर-बिलरियागंज मार्ग
सगड़ी। सोमवार रात करीब 10.30 बजे हुए हादसे के बाद जीयनपुर-बिलरियागंज मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। टैंकर में लगी आग बुझाने के लिए छह दमकल की गाड़ियां देर रात से मंगलवार सुबह तक लगी रहीं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने मार्ग को बंद कर वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा। मंगलवार सुबह करीब 9.30 बजे क्रेन से जले हुए टैंकर को हटाने के बाद सड़क साफ कराई गई और करीब 10 बजे के बाद यातायात सामान्य हो सका। इस दौरान करीब 11.30 घंटे तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लगी रही।
हादसे की सूचना पर रातभर डटे रहे प्रशासनिक अधिकारी
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सगड़ी संजीव कुमार राय, तहसीलदार नवीन निश्चल त्रिपाठी, नायब तहसीलदार आदर्श सिंह, हल्का लेखपाल समरजीत यादव, सीओ सगड़ी भूपेश पांडेय तथा जीयनपुर कोतवाल संजय सिंह और बिलरियागंज थाना प्रभारी अमित कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ देर रात से मंगलवार सुबह तक मौके पर डटे रहे। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की, भीड़ को घटनास्थल से दूर रखा और यातायात व्यवस्था को सुचारु कराने में जुटे रहे। छह दमकल वाहनों के साथ पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान संचालित किया।
शव की पहचान में घंटों उलझे रहे परिजन
भीषण आग में तीनों शव इस कदर झुलस गए थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। मौके पर पहुंचे परिजन लंबे समय तक शवों की पहचान को लेकर असमंजस में रहे। मृतकों के कपड़ों और अन्य उपलब्ध संकेतों के आधार पर पहचान कराने का प्रयास किया गया। मेंहनगर के भीखमपुर निवासी प्रदीप कुमार की पहचान उसके परिजनों ने उसकी जली हुई शर्ट से की। वहीं, अन्य दो मृतकों की पहचान कराने में भी पुलिस और परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कभी परिजन कहते कि यह मेरे बच्चे का शव है, तो कभी कहते कि यह मेरे बच्चे का शव है। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।