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बसपा की उम्मीद का चेहरा थे उमाशंकर: लगातार तीन बार विधायक, दयाशंकर संग विवाद, 2000 में पहली जीत; राजनीतिक सफर

Thu, 06 Aug 2026 09:52 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 06 Aug 2026 09:52 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उमाशंकर सिंह पूर्वांचल की राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे और कई वर्षों तक रसड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। आइए जानते हैं उनका राजनीतिक सफर

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Uma Shankar Singh BSP Leader Death News Know His  Political Journey and Controversies
Uma Shankar Singh - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़, जनसेवा और संगठन के प्रति निष्ठा के लिए विशेष पहचान रखते थे। 
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वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा, तब उमाशंकर सिंह ने रसड़ा विधानसभा सीट से शानदार जीत दर्ज कर पार्टी का विधानसभा में खाता खोला। वह उस चुनाव में बसपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले इकलौते विधायक थे। इसके बाद पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया।
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प्रारंभिक जीवन और परिवार
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र स्थित खनवर गांव में हुआ। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त पूर्व सैन्यकर्मी थे। उनका मूल निवास बलिया जिला है। पारिवारिक संस्कारों और अनुशासित वातावरण ने उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन को मजबूत आधार प्रदान किया।

पहली बार साल 2012 में हासिल की थी जीत
उमाशंकर सिंह ने पहली बार 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार विजय हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। लगातार तीन बार जनता का विश्वास प्राप्त करना उनके क्षेत्र में मजबूत जनाधार और लोकप्रियता का प्रमाण माना जाता है।
 
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साल 2022 में बसपा की उम्मीद थे
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, तब उमाशंकर सिंह ने रसड़ा विधानसभा सीट जीतकर पार्टी की प्रतिष्ठा बचाई थी। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा, सक्रिय भूमिका और संगठन में प्रभाव को देखते हुए उन्हें बसपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया था।
 

सामाजिक कार्यों से भी बनाई पहचान
राजनीति के साथ-साथ उमाशंकर सिंह व्यवसाय (ठेकेदारी) और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों की समस्याओं के समाधान, जनसंपर्क और सक्रिय कार्यशैली के कारण उन्होंने एक अलग पहचान बनाई थी। स्थानीय स्तर पर उन्हें एक कद्दावर, प्रभावशाली और मददगार नेता के रूप में देखा जाता है। क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का आधार जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना और विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करना माना जाता है।
 

दयाशंकर सिंह के साथ विवाद को लेकर भी रहे चर्चित
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह और बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बीच राजनीतिक और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर विवाद चर्चा में रहा है। दोनों नेता बलिया क्षेत्र से आते हैं और ठाकुर समुदाय से संबंधित हैं।

विवाद की मुख्य वजह कटहल नाला पुल
बलिया में एनएच-31 पर स्थित कटहल नाला के नवनिर्मित पुल को बिना सूचना और उद्घाटन के यातायात के लिए खोले जाने से यह विवाद शुरू हुआ था।
 

अधिकारियों पर आरोप
मंत्री दयाशंकर सिंह ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को फटकार लगाई और आरोप लगाया कि ये अधिकारी बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के इशारे पर काम कर रहे हैं।

पलटवार और चेतावनी
उमाशंकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मंत्री को नसीहत दी कि पुल केंद्र सरकार/एनएचएआई के अधीन है। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने कारनामों को उजागर करना शुरू किया, तो मंत्री को छुपने की जगह नहीं मिलेगी।
 

राजनीतिक मायने
स्थानीय स्तर पर इसे पूर्वांचल और बलिया की राजनीति में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जाता है।
 

व्यक्तिगत बयानबाजी
यह विवाद समय-समय पर तीखे बयानों और एक-दूसरे पर विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोपों के साथ राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा है।

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर किया राजनीति में प्रवेश
वर्ष 2000 में बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए उमाशंकर सिंह ने बाद में मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया। समय-समय पर उनके राजनीतिक रुख और विभिन्न दलों के साथ नजदीकियों की चर्चाएं होती रही हैं, हालांकि वह मुख्य रूप से बसपा के ही विधायक रहे।
 

आयकर विभाग ने आवास पर मारा था छापा
बसपा विधायक उमा शंकर सिंह व उनके करीबियों के ठिकाने पर आयकर विभाग की टीम ने 2026 में छापा मारा था। आईटी की कार्रवाई में करीबियों के ठिकानों से अब तक 10 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ था। गोमती नगर, लखनऊ स्थित आवास एवं ऑफिस पर इनकम टैक्स विभाग ने जांच की थी। खनवर में उनके आवास पर आईटी ने छापा मारा था।
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