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मिर्जापुर के बलुआ पत्थर प्रदेश में बिखेरेंगे चमक, मंदिरों और घाटों की बढ़ाएंगे शोभा 

Sat, 02 Jan 2021 01:22 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर Published by: विचित्र सिंह Updated Sat, 02 Jan 2021 01:22 AM IST
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Sandstone of Mirzapur Chunar will shine in the beauty of temples and ghats Ram Mandir Ayodhya Kashi Vishwanath
विश्वनाथ कारिडोर में मिर्जापुर के बलुआ पत्थरों का इस्तेेमाल - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो या काशी में नए बनने वाले घाट, सब कुछ ठीक रहा तो प्रदेश में होने वाले सभी ऐसे निर्माण में मिर्जापुर के बलुआ पत्थर (चुनार के सैंड स्टोन) अपनी चमक बिखेरेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद बलुआ पत्थर से जुड़े कारोबारियों, श्रमिकों में जबरदस्त उत्साह है। अगली स्लाइड में पढ़ें पत्थर की विशेषता...

Sandstone of Mirzapur Chunar will shine in the beauty of temples and ghats Ram Mandir Ayodhya Kashi Vishwanath
काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

चुनार के बलुआ पत्थर का जीआई पंजीकरण होने के साथ इसे देश की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार कर लिया गया है। यह देश का दूसरा प्राकृतिक उत्पाद में पंजीकृत जीआई (भौगोलिक संकेतक) उत्पाद है। चुनार बलुआ पत्थर को जीआई संख्या 557, वर्ग-19 के अंतर्गत प्राकृतिक उत्पाद की श्रेणी में बौद्धिक संपदा का दर्जा प्राप्त हो गया।

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काशी विश्वनाथ कारिडोर के विकास कार्यों का निरीक्षण कर सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

अब इस बहुमूल्य पत्थर पर मिर्जापुर, सोनभद्र एवं चंदौली जनपद का ही कानूनी अधिकार है और यहीं से निकलने वाले पत्थर को ही चुनार (मिर्जापुर) का बलुआ पत्थर कहा जाएगा। चुनार बलुआ पत्थर का कारोबार दो हजार करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा है। अहरौरा, मड़िहान, राजगढ़, भुइली, सक्तेशगढ़, चुनार, जमालपुर, सोनभद्र के सुकृत तथा चंदौली के कई इलाकों में यह पाया जाता है। प्रमुख कारोबारी चंदन पांडेय, पीयूष श्रीवास्तव, अरविंद मौर्या, नागेश सिंह, राजू सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा का स्वागत किया और इसे विकासोन्मुख कदम बताया है। 

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निर्माणाधीन काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

विश्वनाथ कारिडोर में लगाए जा रहे बलुआ पत्थर

विश्वनाथ कारिडोर में मिर्जापुर के बलुआ पत्थरों का इस्तेेमाल किया जा रहा है। अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए भी बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किए जाने की कवायद चल रही है।

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चुनार किला। - फोटो : अमर उजाला

चुनार का बलुआ पत्थर है खास

पत्थर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना ही प्राचीन होता जाएगा,  वायु घर्षण से उसकी चमक बढ़ती जाएगी तथा जल के अंदर सैकड़ों वर्षों तक रहने के बावजूद यह खराब नहीं होता है। विंध्य पर्वत माला एवं गंगा के किनारे की विशिष्ट प्राकृतिक संरचना, मिट्टी और पत्थर की विशिष्ट गुणवत्ता के कारण ही चुनार के बलुआ पत्थरों की विशेष पहचान है। इसकी प्रसिद्धि दुनिया के दूसरे देशों में भी हैं।

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