सब्सक्राइब करें

सांस्कृतिक विरासत का सम्मान: बनारस के सुर, लय और ताल के साधकों की परख, आठ कलाकारों को मिला संगीत नाटक सम्मान

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 17 Mar 2026 01:41 PM IST
सार

Varanasi News: काशी के गायन से लेकर शहनाई और दुक्कड़ व वायलिन सहित पांच विधा के आठ कलाकारों को संगीत नाटक सम्मान मिला। इसमें घराने के प्रख्यात कलाकार पं. राजन-साजन मिश्र की अगली पीढ़ी भी शामिल है।
 

विज्ञापन
Sangeet Natak Samman Recognizing Masters of Banaras Melody Rhythm and Beat Recipients in varanasi
काशी के गायन से शहनाई, दुक्कड़ व वायलिन सहित पांच विधा के आठ कलाकारों के सिर सजा ताज - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पिछले चार साल के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के नामित कलाकारों की घोषणा की हैं। इसमें काशी के विभिन्न विधाओं के आठ कलाकार हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला। बनारस घराने के सिद्धहस्त कलाकारों की अगली पीढ़ियों को भी यह सम्मान मिला है। इसमें घराने के प्रख्यात कलाकार पं. राजन-साजन मिश्र की अगली पीढ़ी भी शामिल है।

Trending Videos
Sangeet Natak Samman Recognizing Masters of Banaras Melody Rhythm and Beat Recipients in varanasi
प्रो. राजेश शाह - फोटो : अमर उजाला
2024 : प्रो. राजेश शाह: सितार में बनारस और सेनिया घराने का किया नाम
बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के वाद्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेश शाह को 2024 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। बनारस और जयपुर के सेनिया घराने के प्रख्यात सितार वादक प्रो. राजेश गायकी अंग के सितार वादक हैं। 33 साल से बीएचयू और वसंत महिला महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के बाद प्रोफेसर हुए। नौ साल की उम्र से ही उन्होंने सितार सीखना शुरू किया था। महाराष्ट्र के जलगांव में जन्म लिए प्रो. राजेश ने महाराष्ट्र के पं. गोविंद के बाद बनारस घराने के पं. अमरनाथ मिश्र से सितार की शिक्षा ली। इसके बाद बीएचयू में प्रो. रामदास चक्रवती से सेनिया घराने की वादन शैली सीखी। उनके निर्देशन में 20 विद्यार्थियों ने शोध किया और अब देश के अन्य विश्वविद्यालयों में शिक्षण सेवा दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Sangeet Natak Samman Recognizing Masters of Banaras Melody Rhythm and Beat Recipients in varanasi
डॉ. रामशंकर मिश्र - फोटो : अमर उजाला
2023 : डॉ. रामशंकर मिश्र: गुरु के जाने पर रामायण के छह कांडों को संगीत में पिरोया
शास्त्रीय संगीत के साधक डॉ. रामशंकर मिश्र बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनको 2023 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। पं. रामाश्रय झा रामरंग के वरिष्ठ शिष्य डॉ. रामाशंकर ख्याल गायकी में पारंगत हैं। उन्होंने प्रयागराज विश्वविद्यालय के अलावा जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में भी सेवा दी है। उनके गुरु द्वारा तैयार संगीत रामायण के बाकी बचे छह कांडों को डॉ. रामशंकर ने पूरा किया। इसकी प्रस्तुति मॉरीशस के रामायण सेंटर में दे चुके हैं।
Sangeet Natak Samman Recognizing Masters of Banaras Melody Rhythm and Beat Recipients in varanasi
पं. जवाहर लाल - फोटो : अमर उजाला
2021 : पं. जवाहर लाल: चौथी पीढ़ी के बने साधक, नाना से सीखी शहनाई
काशी के प्रसिद्ध शहनाई वादक पं. जवाहरलाल को 2021 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। उनकी चौथी पीढ़ी संगीत को आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि आखिरकार सरकार ने कला की पहचान की और सम्मान दिया। पं. जवाहर लाल ने 14 साल की उम्र से ही शहनाई की साधना शुरू कर दी थी। नाना नंदलाल, पं. महादेव प्रसाद मिश्र, कन्हैयालाल से शहनाई की शिक्षा ली। वह शहनाई के गायकी अंग का वादन करते हैं। रामापुरा के शहनाई घराने के वादकों में एक जवाहरलाल विदेशों में मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल में भी शहनाई की धुन बिखेर चुके हैं। उनको सुर शृंगार अकादमी सम्मान, यूपी गौरव अलंकरण सम्मान, संगीत भास्कर अलंकरण सम्मान भी मिल चुका है।
विज्ञापन
Sangeet Natak Samman Recognizing Masters of Banaras Melody Rhythm and Beat Recipients in varanasi
पं. मंगल प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
2024 : पं. मंगल प्रसाद: आठ साल में दुक्कड़ सीख बनाई पहचान
एक अलग तरह के वाद्ययंत्र दुक्कड़ के साधक पं. मंगल प्रसाद 76 साल के हैं। 60 साल से वह दुक्कड़ बजा रहे हैं। वह देश के नामचीन शहनाई वादकों के साथ संगत कर चुके हैं। पं. मंगल प्रसाद ने अपने पिता नान्हक राम से आठ वर्ष की उम्र से दुक्कड़ की शिक्षा ग्रहण की, जो अपने जमाने के प्रख्यात दुक्कड़ वादक थे। ठुमरी सम्राट पं. मंगल प्रसाद से भी दुक्कड़ वादन की बारीकियों के साथ लयकारी व ताल की शिक्षा ली। वह आकाशवाणी के ए ग्रेड के कलाकार हैं। वह तानसेन समारोह ग्वालियर, भोपाल गंगा महोत्सव, केरल, अहमदाबाद, जबलपुर, मुम्बई, कलकत्ता, भोपाल, दिल्ली, पुष्कर आदि शहरों में वादन कर चुके हैं। विदेशों में रूस, यूरोप और पुर्तगाल जैसे देशों में भी बजाए हैं। उन्हें कौस्तुभ कला रत्न सम्मान मिल चुका है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed